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बेरहम पिता ने चलती ट्रेन से अपनी तीन बेटियों को फेका, एक की मौत दो की हालात नाजुक

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संजीव मिश्रा, सहरसा; कोई पिता इस हद तक गिर सकता है, कोई कल्पना भी नही कर सकता. आखिर सभ्य समाज मे क्या ये उचित है जिसे अंजाम खुद पिता ने दिया हो. घटना आज सुबह की सहरसा जिले की है. बेरहम पिता ने अपनी ही तीन मासूम बेटियों को चलती ट्रेन से फेंक दिया जिसमें एक बच्ची की मौत हो गई. जबकि दो की हालत नाजुक है, ग्रामीण मुकेश कुमार की सूचना पर 108 एम्बुलेंस की सहायता से घायल बच्चियों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया.

एक बच्ची को होश आ गया है, जबकि दूसरी अब भी गंभीर अवस्था मे है. हमारे सहयोगी तपन कुमार शिन्हा के अनुसार आज सुबह लगभग चार बजे अमृतसर से बिहार के सहरसा जा रही ट्रेन नम्बर 152101 अमृतसर-सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस ट्रेन से दो मासूम बच्चियों को उसके पिता ने ही फेंक दिया. सुबह लगभग पांच बजे रामकोट थानाक्षेत्र के भवानीपुर गांव के पास टहलने निकले मुकेश कुमार ने बच्ची को रेल पटरी के किनारे बेहोशी की हालत में पड़ा देखा.

बेहोश बच्ची को पानी के छींटे मारकर होश में लाया गया. होश में आने पर आठ साल की अल्बुन खातून ने कुछ दूर पहले छोटी बहन को भी फेंके जाने की जानकारी दी. मुकेश ने 100 नंबर के साथ 108 एम्बुलेंस को इसकी सूचना दी, और अन्य ग्रामीणों को लेकर दूसरी बच्ची की खोज में जुट गए. लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरी बच्ची बेहोशी की हालत में पड़ी मिली. तब तक एम्बुलेंस भी पहुंच चुकी थी. एम्बुलेंस से घायल बच्चियों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां दोनों का इलाज शुरू हो गया है.

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अस्पताल में होश आने पर पिता की बेरहमी का शिकार हुई आठ साल की अल्बुन खातून ने बताया कि बिहार प्रांत के मोतिहारी जिले के गांव छोड़िया निवासी अपने पिता इड्डू व मां अबलीना खातून के साथ ट्रेन से जा रही थी, सुबह के समय उसकी मां अबलीना खातून गहरी नींद में सो गई, इसी दौरान उसके पिता उसकी छह वर्षीय बहन सलीना खातून को गेट के पास लेकर पहुंचे और चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया. इसके बाद उसे भी गेट के पास ले गए और फेंक दिया. दूसरी ओर छह वर्षीय सलीना खातून को अभी तक होश नहीं आया है. चिकित्सकों का कहना है कि बच्ची के सिर में गहरी चोट के वजह से होस नही आ रहा है. समाचार लिखे जाने तक दोनों का इलाज चल रहा है जिसमे एक कि हालात गंभीर बनी हुई है.

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