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बिहार में लीडरशिप क्राइसिस और उसमे युवाओं की भूमिका

modi nitish


बिहार अभी पोलिटिकल लीडरशिप क्राइसिस के दौर से गुजर रहा है जबकि हम बहुत सारे क्षेत्रों में अव्वल हैं. हम देश में नं.1 बन सकते हैं. जब मैं इसके बारे में सोचता हूँ तो पता चलता है कि बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है ये क्यूंकि हमारे पास देश का बेहतरीन दिमाग है. हम देश के सबसे प्रतिष्ठित जॉब IAS के मामले में देश में दूसरा स्थान रखते है. IIT में भी हम हमेशा टॉप 5 में रहते हैं. मतलब कुछ तो बात है हम में. पर जब हम दूसरी तरफ नजर डालते है, तो पता चलता है कि हम अभी भी गरीबी के मामले में पूरे देश में टॉप पर है. 33% लोग आज भी गरीबी रेखा के नीचे रहते है. 37% लोग स्कूल नहीं गये है और सबसे शर्मनाक बात तो ये है कि बिहार में आज भी 74% घरों में बिजली नहीं पहुंच पायी है.


bihar election 2015

ये आंकड़े देखने से पता चलता है कि हम लोग गरीब तो है, पर इसलिए नहीं क्यूंकि हममें योग्यता की कमी है पर इसलिए क्यूंकि हमारे पॉलिटिशियन हमें शिक्षित और खुशहाल होने नहीं देना चाहते है. क्यूंकि ऐसा होने के बाद जातियों और धर्मों के नाम पर बंटे लोग उनके लिए वोट बैंक नहीं रह जायेंगे.

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वैसे तो देश में एक दो लीडर ही हैं जो दीर्घकालिक सोच सकते है और लड़ झगड़ के ही सही मगर अपने राज्य के लिए सेंटर से पालिसी तो बनवा ही लेते है. पर हमारे यहाँ तो ऐसे लोग भी नहीं हैं. 20 सालो से हमारा सेंटर से कोई लेना देना नहीं है और जिसके कारण कोई भी पालिसी और प्लान बिहार के मद्देनजर रखते हुए नहीं बन पा रही है. मेरा अपना मानना यह है कि राज्य की प्रगति में बाधा हमारे कमजोर और स्वार्थी नेता हैं.
हमारे यहाँ अभी कोई भूमिहार लीडर है, कोई यादव लीडर है, तो कोई कुछ और जाति का लीडर है, पर कोई भी बिहार का लीडर नहीं है, जो सम्पूर्ण बिहार के विकास और संप्रभुता के बारे में सोच सके. जो ‘बिहार फर्स्ट’ बोल सके.

जब तक बिहार फर्स्ट बोलने वाला कोई नेता नहीं आयेगा, हमारे लिए आगे बढ़ पाना बहुत ही मुश्किल होगा.
अब हमें बिहार के पुरे लीडरशिप को बदलने की जरुरत है. ये सारे पॉलिटिशियन राज्य से ज्यादा परिवार और पार्टी चलाने में लगे हुए है.
एक नई सोच और दिशा की जरुरत है बिहार को.

बुध, महावीर और सम्राट अशोक जैसे बुद्धिजीवी और शासकों का की धरती रही है बिहार और हमें विष्वास है, हमारे गौरव भरे दिन लौटेंगे और हम फिर से देश में सबसे उत्कृष्ट राज्य होंगे.

इस नई क्रांति की तैयारी में हमें अभी से लगना होगा क्यूंकि उसका वक़्त कभी भी आ सकता है और हम युवाओं को ही उसका सिपाही बनना होगा.

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