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बिहार में खुली सुशासन की पोल, अब तक छात्रों को ये सुविधाएं नहीं उपलब्ध करा सकी सरकार

Nitish kumar
Nitish kumar

फ़ाइल फोटो


अजित कुमार,पटना: वैसे तो बिहार सरकार सुशासन कि खूब तारीफ करती फिरती है जिसमे छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में उल्लेख करना नहीं भूलती है लेकिन भाजपा के वरीय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने जो बाते कही है उससे सरकार के दावो की पोल खोल कर रख देती है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि शैक्षणिक व वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है मगर करीब 17 लाख छात्र-छात्राओं को 2016 में मिलने वाली साइकिल और डेढ़ करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को पोशाक की राशि अब तक नहीं मिली है.

शराबबंदी के बाद घोर वित्तीय संकट के कारण राशि वितरण की बात तो दूर सरकार ने पिछले वर्ष के 1081 करोड़ के बजट की तुलना में इस वर्ष साइकिल और पोशाक की राशि में 681 करोड़ की भारी कटौती कर दी है चुनावी वर्ष में साइकिल और पोशाक के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता को खत्म करने वाली सरकार ने पैसे की कमी के कारण इस साल फिर से इसे अनिवार्य कर दिया है ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को इसके लाभ से वंचित किया जा सके.

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सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री पोशाक योजना, साइकिल योजना व किशोरी स्वास्थ्य योजना की राशि चुनावी वर्ष 2015 के जुलाई-अगस्त में ही दे दी गई थी, जबकि 2016 के अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र के लिए जनवरी 2017 तक राशि नहीं दी गई है जबकि दो महीने बाद सत्र समाप्त हो जायेगा और छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में चले जायेंगे. 

भाजपा जब सरकार में थी तो साइकिल व पोशाक योजना प्रारंभ की गई थी मगर अब ये योजनाएं हांफ रही है और धीरे-धीरे बंदी की ओर बढ़ रही है दलितों व पिछड़ों की छात्रवृत्ति को सरकार पहले ही बंद कर चुकी है पिछले वर्ष की तुलना में पोशाक राशि में 400 करोड़ तथा साइकिल योजना की राशि में 281 करोड़ की कटौती कर दी गई है। आर्थिक संकट के कारण सरकार की मंशा अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को इन योजनाओं के लाभ से वंचित करने की है.

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