Input your search keywords and press Enter.

68वां गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा देश, रो रहा है ‘स्वतंत्रता की निशानी’

republic day pic


बीजे बिकास. दरभंगा : आज देश 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन देश के स्वतंत्रता के 70 साल होने के वाबजूद भी आज़ादी के समय की ऐतिहासिक धरोहरें अपने हालत पर आंसू बहाने को विवश है. हम बात कर रहे है स्वतंत्रता संग्राम के साक्षी रहे बिहार के दरभंगा जिला स्थित नेशनल स्कूल की जिसका नाम शान से तो लिया जाता है, लेकिन इसका नामो-निशान मिटने के कगार पर है.

इस स्कुल की यादों में आजादी की लड़ाई की कई कहानियां दफन हैं. महात्मा गांधी के आह्वान पर यहीं पं.रामनंदन मिश्र की पत्नी ने पर्दा प्रथा से अपने को मुक्त कर नारी चेतना का शंखनाद किया था. 27 वर्षों तक यह स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहने वाला नेशनल स्कुल वर्तमान में न सिर्फ उपेक्षित है, बल्कि पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है.

एक बारगी कोई भी इसकी जीर्ण-शीर्ण हालत में इमारतों के अवशेष को देख यह नहीं कह सकता है की यहाँ कोई स्कूल भी था. असहयोग आंदोलन के समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दरभंगा आए थे इसी क्रम में उन्होंने बेंता मैदान में आयोजित सभा को संबोधित किया. लोगों के मन में आजादी को लेकर उबाल मचलने लगा, अंदोलन की धारा तेज हो उठी. इसी क्रम में गांधी की पहल पर दरभंगा नेशनल स्कूल की स्थापना हुई थी और इसी जगह से आंदोलन को जीवंत किया जाने लगा था.

Loading...

स्वतंत्रता सेनानी कमलेश्वरी चरण सिन्हा के नेतृत्व में समाज को शिक्षित करने व राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से 1920 में नेशनल स्कूल की स्थापना हुई थी. दरभंगा शहर के मध्य भाग में लालबाग मोहल्ले में स्थित इस विद्यालय का संचालन 1924 में बंद हो गया और इसके स्थान पर स्वतंत्रता सेनानियों का केंद्र स्थल बन गया. ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान नेशनल स्कूल परिसर में घुसने के बाद हमें सीताराम नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति से मुलाकात हुई, जो की नेशनल स्कूल के खंडहर के सामने अपनी रोजी-रोटी के लिए चाय की दूकान चला रहे है. सीताराम ने बताया की वह इस नेशनल स्कूल के छात्र रह चुके है. आगे उन्होंने बताया की पिछले कुछ वर्षों में कई बार स्थानीय विधायक और कई मंत्री इस स्कूल के निरिक्षण में आये, तत्कालीन कला व संस्कृति मंत्री सुखदा पांडेय भी इसका जायजा ले चुकी हैं लेकिन अभी तक स्कूल के जीर्णोधार को लेकर किसी भी प्रकार का सकारात्मक पहल नहीं हो सका है.

यहाँ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बार डॉ. राजेंद्र प्रसाद का यहां आना-जाना भी हुआ और फिर राष्ट्रपति बनने के बाद भी दो बार डॉ. प्रसाद यहां आए. यहाँ जय प्रकाश नारायण, विनोबा भावे सहित कई स्वतंत्रता सेनानीयों का आना-जाना रहा है, 1955 में कमलेश्वरी चरण सिन्हा के निधन पर भी डॉ. प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण समेत उस समय की कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं पर अभी तक इसका कुछ नही हो सका है. 1927 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अनाथालय की आधारशिला रखी थी, वह शिलापट्ट आज भी इसका गवाह बनकर विद्यमान है. फिर 1934 में भूकंप के बाद भवन के जीर्णोद्धार के लिए शिलापट्ट लगाया गया था. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने यहीं से पर्दा प्रथा समाप्त करने की अपील की तो पं.रामनंदन मिश्र आगे आए और उनकी पत्नी पर्दा प्रथा से मुक्त होकर संग्राम में आगे आईं थीं.

[related_posts_by_tax title=”रिलेटेड न्यूज़:” posts_per_page=”3″]
इस न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.
[addtoany]

Leave a Reply

Your email address will not be published.