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बाहुबली शहाबुद्दीन पर हाईकोर्ट के फैसले पर चंदा बाबू का बड़ा बयान, कहा सूबे में…

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राजद के पूर्व बाहुबली पूर्व सांसद और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन को पटना हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. जस्टिस के के मंडल और संजय कुमार की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है. फैसले के बाद पीड़ित परिवार के मुखिया चंदा बाबू ने भी इसे न्याय की जीत बताया. चंदा बाबू ने कहा कि सूबे में सरकार बदली है तो हमें राहत की उम्मीद है. कहा कि इस केस में न्यायपालिका जिस तरह से फैसला सुना रही है और सबों को सहयोग मिल रहा है उससे मेरा भरोसा बढ़ रहा है.

अपने दो बेटों को एक साथ गंवान वाले चंदा बाबू ने कहा कि हमारे दोनों बच्चे सीवान की आजादी के लिये शहीद हुए थे और अब ऐसा लग रहा है कि मेरा सीवान सच में आजाद हो गया है. कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि बच्चों की याद में आज भी आंखों में आंसू हैं लेकिन दुख के साथ-साथ खुशी इस बात की है कि हमें देर से ही सही न्याय और जीत दोनों मिल रही है. चंदा ने न्यूज 18 से कहा कि अब किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि अब सीवान में दबंग की ताकत नहीं चलने वाली सीवान निर्भिक हो कर रहेगा.

शहाबुद्दीन ने पटना हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दायर किया था लेकिन पटना हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को कोई राहत नहीं दिया गया है. सिवान कोर्ट ने शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुनाई है. चंदा बाबू ने हाई कोर्ट के फैसला का स्वागत किया है. कहा कि मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से भी इसे अधिकतम सजा मिलेगी. ऐसे लोगों के सजा मिलने से ही

बिहार के चर्चित तेजाब कांड में आज फैसला पटना हाईकोर्ट ने दे दिया है. सीवान की स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए शहाबुद्दीन ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर आज फैसला आएगा. शहाबुद्दीन को इस मामले में उम्र कैद की सजा मिली थी जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था. आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने 30 जून 2017 को ही शहाबुद्दीन की सजा पर फैसला सुरक्षित कर लिया था.

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सीवान स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश ने 11 दिसंबर 2015 को तेजाब हत्या कांड के नाम से चर्चित अपहरण एवं हत्या के मामले में मो.शहाबुद्दीन के साथ-साथ राजकुमार साह, मुन्ना मियां एवं शेख असलम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी. घटना को लेकर मृतक की मां कलावती देवी ने 16 अगस्त 2004 को मुफस्सिल थाने में प्राथमिकी दर्ज की थी.

तेजाब हत्या कांड वर्ष 2004 की है. बिहार के सिवान जिले में चंद्रेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू अपनी पत्नी, बेटी और चार बेटों के साथ रहा करते थे. उनकी मुख्य बाजार में दो दुकानें थीं. एक किराने की और दूसरी परचून की. एक दुकान पर उनका बेटा सतीश बैठता था, दूसरे पर गिरीश. 16 अगस्त, 2004 का दिन इस परिवार के लिए कयामत बनकर आया. कुछ लोग चंदा बाबू से रंगदारी मांग रहे थे. मगर उन्होंने देने से इनकार कर दिया था. वही लोग उस दिन उनकी किराने की दुकान पर जा पहुंचे. दुकान पर उनका बेटा सतीश बैठा. उन लोगों ने सतीश से रंगदारी के दो लाख रुपये मांगे.

सतीश ने 30-40 हजार रुपये देने की बात कही। रंगदारी वसूलने आए लोग ज्यादा थे. उनके हाथों में हथियार थे. उन लोगों ने सतीश के साथ मारपीट शुरू कर दी। गल्ले में रखी दो लाख से ज्यादा की रकम भी निकाल ली. सतीश का बड़ा भाई भी वहां आ गया. वो भी सब देख रहा था. पिटने के बाद सतीश घर में गया और बाथरूम साफ करने वाला तेजाब एक मग में डालकर लाया. सारा तेजाब उसने रंगदारी वसूलने आए बदमाशों पर फेंक दिया. तेजाब के छीटें उसके भाई राजीव पर भी पड़े. इसके बाद वहां भगदड़ मच गई.

इसके बाद दुकान पर बदमाशों ने सतीश को पकड़ लिया. उसका भाई राजीव भागकर कहीं छिप गया. फिर उसकी दुकान को लूटा गया. उसके बाद दुकान में आग लगा दी गई. बदमाश सतीश को एक गाड़ी में डालकर अपने साथ ले गए. दूसरी दुकान पर बैठे गिरीश को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. कुछ देर बाद उसके पास भी हथियारबंद बदमाश पहुंचे और उसे भी वहां से अगवा कर लिया गया.

इसके बाद सतीश और गिरीश का बड़ा भाई राजीव भी उन बदमाशों के हत्थे चढ़ चुका था. रंगदारी न देने की वजह से उनकी दोनों दुकाने लूट ली गईं. फिर तीनों भाईयों को एक जगह ले जाया गया. जहां राजीव को रस्सी से बांध दिया गया. उसके बाद सरेआम सतीश और गिरीश के ऊपर तेजाब से भरी बाल्टी उड़ेल दी गई. बड़े भाई की आंखों के सामने सतीश और गिरीश को तेजाब से जलाकर मार डाला गया. इसके बाद उन दोनों की लाश के टुकड़े टुकड़े करके बोरे में भरकर फेंक दिए गए.

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