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अनुदान की राशि में हो रहा फर्जीवाड़ा, सीएम नीतीश से उठी जांच की मांग

nitish kumar

फाईल फोटो


ललन कुमार, शेखपुरा : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों में शामिल खुले में शौच मुक्त अभियान पर अब उंगलियां उठनी शुरू हो गयी है. यह अंगुली कोई और नहीं समता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व में नीतीश कुमार के चहेतों शामिल राजेंद्र प्रसाद ने उठाया है. उन्होंने कहा कि शेखपुरा ही नही बल्कि पूरे बिहार में जो भी पंचायत खुले में शौच मुक्त जिला प्रशासन द्वारा घोषित किया गया है उसकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उच्च स्तरीय जांच करवा लें तब जिला प्रशासन की असलियत की पोल खुल जाएगी.

उन्होंने कहा कि जिन पंचायतों को खुले में शौच मुक्त घोषित जिला प्रशासन द्वारा घोषित किया गया है उन पंचायतों के सभी गाँवों के घरों में सौ प्रतिशत शौचालय बना हुआ होना चाहिए लेकिन उन्होंने दाबा करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ है. आज भी लोग उन पंचायतों में खुले में शौच कर रहे हैं. इसका कारण यह है कि जिन घरों में पूर्व से निर्मित शौचालय है उन्हें ही शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली 12 हजार की राशि दी गयी है और दी जा रही है.

गरीब लोगों को घरों में शौचालय निर्माण करवाने के लिए पहले विकास मित्र को या वार्ड पार्षद को 1000-2000 रु चढावा देना पड़ता है तब कहीं वैसे लोगों का काम होता है. राजेंद्र ने कहा कि शौचालय निर्माण के नाम पर अधिकारी और दलाल गरीबो के मिलने वाली शौचालय निर्माण के 12 हजार रु अनुदान की राशि को लूट रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि सरकार को जिला प्रशासन कागजी खाना पूर्ति कर खुले में शौच मुक्त घोषित कर आँखों में धूल झोंक रही है. खुले में शौच मुक्त के नाम पर करोड़ों का घपला है. इसकी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस मामले का सर्वे कराकर उच्च स्तरीय जांच यदि करवा लेते हैं तो जिला प्रशासन के द्वारा खुले में शौच मुक्त घोषित हुए पंचायत की असलियत की पोल स्वतः ही खुल जाएगी.

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