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पटना के लाल सौरभ के अंतिम विदाई में पटना वासियों की आंखे हुई नम, पूरा पटना डूबा शोक में…

saurbh kumar last moment

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हितेश कुमार,पटना: हाल ही मे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुए नक्सली हमले में 25 वीर सपूत शहीद हो गये, जिसमें 6 बिहार के लाल भी शामिल थे. शहीदों की खबर जब इनके घर वालों को मिली तो अचानक से चित्कार की आवाज से माहौल गमगीन हो गया. इस गम भरी वक़्त में आसपास के लोग परिजनों को ढाढस बनाने की कोशिश करते रहे,लेकिन गम का आलम इतना बड़ा था कि ढ़ांढ़स बनाने आए पड़ोसी भी उसी गम में शामिल हो गए. गम का चित्कार तो तब दिखा जब शहीदों के पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा.

ऐसे में आंसुओं को रोक पाना सभी के लिए और भी मुश्किल हो गया. हम बात कर रहे है पटना के दानापुर इलाके में इमर्सन रोड स्थित सौरभ कुमार की.इनका पार्थिव शरीर जब इनके घर पहुचा,उस शहीद के परिजन बदहवास होने लगे और अपने चित्कार को रोक नहीं सके. वही एक ओर पत्नी अपने शहीद पति के शव को देखने के बाद बेहोश होकर गिर पड़ी, तो दूसरी ओर शहीद की मां को अपने बेटे के अंतिम दर्शन के गम में दांते लग रही थी.

शहीद के अंतिम संस्कार की तयारी के साथ ही जब राम नाम सत्य है के नारों के साथ सौरव का शव उठा तो उस वक़्त तक उस शहीद के 7 महीने के बच्चे को जरा भी इसका अहसास नहीं था कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे.शहीद के पिता खुद और परिजनों को ढाढस बढ़ाने के खातिर अपने कलेजे पर पत्थर रख कर सबसे कह रहे थे कि मेरा बेटा मरा नहीं है बल्कि शहीद हो गया है. भारत माता की रक्षा के लिए बलिदान हुआ है,मेरा बेटा.माहौल एक बार पुनः गमगीन तब हो उठा जब शहीद के 7 साल के बेटे को अंतिम दर्शन के लिए बुलाया गया.उस समय उस बच्चे को यह भी पता नहीं कि उसके पिता अब उसे प्यार करने कभी नहीं आएंगे.

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तीन भाइयों में सबसे बड़े सौरव ने सन 2011 में सीआरपीएफ की नौकरी ज्वाइन किए थे. तब पूरे परिवार में खुशी का माहौल था. फिर 2014 में सौरव की शादी प्रीति से हुई.सौरभ अपनी छुट्टियां खत्म कर 13 मार्च को ड्यूटी जॉइन करने गया था.जिसके बाद उसकी पत्नी प्रीति मायके चली गई थी.प्रीति को जब अपने पति को शहीद होने की खबर मिली तो वो वही बेहोश हो पडी. इसके बाद जैसे-तैसे उसे ससुराल लाया गया. यहाँ का माहौल भी गमों से भरा पडा था, कहीं किसी को दांते लग रही थी तो कही कोई बेहोश पडे था, ऐसी अनहोनी की आशंका किसी को नहीं था. ऐसे में सौरभ के छोटे भाई को जरा भी समझ नहीं आ रहा था कि आगे कैसे क्या होग? फिर देर रात शहीद के पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और शहीद के छोटे भाई ने अपने शहीद भाई को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई किया.⁠⁠⁠⁠

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