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तेजप्रताप और तेजस्वी के बाद बेटी मीसा के खेल का चैनेल ने किया खुलासा, जान दंग रह जायेंगे

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फ़ाइल फोटो


आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती पर अब अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ ने खुलासा किया है दिल्ली में लालू के परिवार के कुछ लोगों ने करोड़ों की जमीन मुखौटा कंपनियों के जरिए बहुत ही कम दाम में खरीदी. आरोप है कि यह काम संदेहास्पद कंपनियों के शेयर खरीदने और बेचने की आड़ में किया गया. आरोपों के घेरे में लालू की सबसे बड़ी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती और दामाद शैलेश कुमार हैं. राजधानी दिल्ली में इनके द्वारा एक करोड़ 41 लाख रुपये में खरीदी कई संपत्तियों की कीमत 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

टाइम्स नाउ के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार ने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के नजदीक बिजवासन में एक फार्महाउस सिर्फ 1.41 करोड़ रुपये में खरीद लिया. इस इलाके में कई अमीर और प्रभावशाली लोगों की संपत्तियां हैं. इसके अलावा मीसा और उनके पति ने सैनिक फार्म्स में भी एक फॉर्महाउस खरीदा. इसे खरीदने की प्रक्रिया भी संदेहास्पद लग रही है. रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रेकॉर्ड के मुताबिक, मीसा और शैलेश कम से कम चार प्राइवेड लिमिटेड कंपनियों के डायरेक्टर हैं. मीसा और शैलेश ने दिसंबर 2002 में मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई और इसका रजिस्ट्रेशन लालू के ऑफिशल बंगले 25, तुगलक रोड, नई दिल्ली पर कराया गया. यह बंगला लालू को राज्यसभा सांसद के तौर पर मिला था।

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टाइम्स नाउ के मुताबिक बैलेंस शीट के मुताबिक कंपनी के बिजनस गतिविधियां 2006 में बंद हो गईं, जिसके बाद उसका प्लांट और मशीनरी भी बेच दी गई. इसके बाद साल 2008-09 में इसी कंपनी ने बिजवासन के 26 पालम फार्म्स में एक फॉर्महाउस 1.41 करोड़ रुपये में खरीदा. इसके लिए फंड का इंतजाम कंपनी के 1,20,000 शेयर्स को बेच कर किया गया. चौंकाने वाली बात यह है कि इन शेयर्स की कीमत 10 रुपये प्रति शेयर थी, पर इन्हें वीके जैन और एसके जैन नाम के दो कारोबारियों को 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेचा गया. गौरतलब है कि जैन भाइयों को इसी साल मार्च में कालेधन की खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद एक साल से कम समय में ही यानी 2009 में मीसा और शैलेश ने इन शेयरों को फिर खरीद लिया. 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेचे गए शेयरों को इस बार सिर्फ एक या दो रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीदा गया. चैनेल का कहना कि यह साफ तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का शक पैदा करता है. मामले की जांच के लिए पालम फॉर्म्स के बिजवासन में गई टाइम्स नाउ की एक टीम ने पाया कि इस प्रॉपर्टी पर अभी तक निर्माण शुरू नहीं हुआ है. इसका एक हिस्सा खेती के कामों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. वहां मौजूद कुछ लोगों ने कन्फर्म किया कि मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड की ही है. मौजूद कर्मशल रेट के हिसाब से देखें तो इस पॉपर्टी की कीमत 40-50 करोड़ रुपये हो सकती है. टाइम्स नाउ ने जैन भाइयों से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. माना जा रहा है कि जैन भाइयों ने इस तरह की कंपनियों सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग के कारोबार के लिए बनाई हैं.

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