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बंद पड़े चीनी मिल चालू करने की उठ रही मांग, किसानों ने किया जल सत्याग्रह

बीजे बिकास : दरभंगा जिले के बंद पड़े सकरी चीनी मिल को चालू कराने एवं पीपी मोड में किए गये अनुबंध को रद्द करने की मांग को लेकर दरभंगा सदर प्रखंड के भालपट्टी गांव के किसानों ने प्रतिकार स्वरूप सुंदरसागर तालाब में छ: घंटा का जल सत्याग्रह किया. किसान गन्ना का पौधा लेकर पानी में खड़े होकर अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे थे.

जानकारी हो कि सकरी चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1934 में राज दरभंगा ने की थी. चीनी मिल चालू होने के बाद यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरी थी, चूकि यह इलाका बाढ़ और सुखार दोनों से ग्रसित रहता है. यहां एक मात्र नगदी फसल गन्ना ही था. बाद के दिनों में चीनी मिल बंद हो जाने के बाद राज्य सरकार ने इसे अधिग्रहित कर लिया. अधिग्रहण के बाद चीनी निगम ने इस मिल को अपने अधीन लेकर चालू कराया, लेकिन बाद में मिल का खास्ताहाल हो जाने के कारण इसे बंद कर दिया गया. मिल के पास बहुत बड़ी पड़ी संपत्ति भी थी.

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पंडौल में हजारों एकड़ का कृषि फॉर्म था, जहां गन्ना उपजाया जाता था. इतना ही नहीं सकरी से लेकर बेनीपुर तक ट्रॉली चतली थी, जिसके लिए रेल लाईन और जमीने थी. जगह-जगह राटन के लिए भी जमीन था. जिसका स्वामित्व निगम के पास था. ग्रामीणों ने बताया कि चीनी मिल जब चालू था तब हमलोगों के लिए यह बैंक के समान था, जरूरत पड़ने पर पैसा उठाते थे. खेती के लिए बीज और खाद उपलब्ध हो जाता था, पर अब सब कुछ खत्म हो चुका है. रोजी-रोटी के अभाव में किसान और मजदूर पलायन को मजबूर हैं.

किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकारी स्तर पर औने-पौन कीमत पर इस मिल को पीपी मोड के तहत दे दिया गया है. प्रबंधन हस्तांतरित करने के बाद भी मिल चालू करने की दिशा में पहल नहीं हुई है, उल्टे परिसर में अवस्थित बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों को काटकर बेच दिया गया. यहां तक कि कुछ मशीनों को भी यहां से हटा दिया गया है. किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनलोगों की मांगों पर सरकार विचार नहीं करेगी तो उनका आंदोलन तेज होगा. जानकारी हो कि पिछले साल मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने चीनी मिल आंदोलन नाम से दरभंगा, मधुबनी में बंद पड़े चीनी मिल को चालू करने की मांग को लेकर मुहिम शुरू किया. जो कि विगत एक वर्षों से बैठक, नुक्कड़ नाटक इत्यादि करके लोगों को जागरूक करने में लगी हुई है. जल सत्याग्रह में वरूण कुमार झा, कृष्णानंद झा, प्रवीण कुमार चौधरी पप्पू, रंजीत कुमार झा, भोला मंडल, सीताराम झा, विजय साह, फुलेश्वर राम सहित दर्जनों किसान शामिल थे.


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