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पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने समाप्त करवाई गृह रक्षकों की हड़ताल…

home guard

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हितेश कुमार,पटना: बिहार गृह रक्षा वाहिनी स्वयंसेवक संघ केंद्रीय समिति बिहार पटना के तत्वाधान में राज्य के गृह रक्षकों के पक्ष में सुनाया गया सर्वोच्च न्यायालय के फैसला समान काम के समान सुविधा को लागू कराने की मांग हेतु गत 2 अगस्त से संघर्षरत हैं. विडंबना यह है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को उच्च न्यायालय द्वारा लागू करने के आदेश के बावजूद गृह रक्षकों को आंदोलन करना पड़ रहा है.

2 अगस्त से गृहरक्षकों के चल रहे आंदोलन के दौरान 9 मार्च को गर्दनीबाग के धरना स्थल पर एक बार फिर से एक जगह इकट्ठा होकर धरना प्रदर्शन किया था. इस दौरान सरकार की कोई भी प्रतिनिधि विज्ञापन लेने तक भी नहीं पहुंचा था. इसके बाद 11 मार्च से 15 मार्च तक राज्य के सभी गृह रक्षक सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया था. इसके बावजूद सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगें. फिर गृहरक्षकों की मांगों को लगातार अनसुना कर रही सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह 16 मार्च को राज्य के सभी गृह रक्षक अपने शस्त्र सहित सरकारी सामान जमाकर निश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए. जो अब तक लगातार चला आ रहा है.

इस तरह सरकार से संघ के प्रतिनिधियों के द्वारा कई दौर की वार्ता भी हुए. जिसमें कई बार सरकार से बात करने का आश्वासन तो कई बार हड़ताल नहीं तोड़ने पर लाठीचार्ज और जेल भेजने तक की धमकियां भी दी गईं. जिसके बावजूद गृह रक्षक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और लगातार यह मांग पूरी नहीं करते हैं तब तक हम प्रदर्शन करते रहेंगे. गृह रक्षक प्रदेश संघ के उपाध्यक्ष कन्हैया राय ने बताया कि इसी दौरान 26 मार्च को प्रधान सचिव (गृह) आमिर सुबहानी से की गई वार्ता में दिए गए धमकियों के बाद गृह रक्षक आहत होकर 28 मार्च को संजय गांधी स्टेडियम से चितकोहरा होते हुए गर्दनीबाग धरना स्थल पहुंचे और सरकार विरोधी नारे भी लगाए. इसके बाद संध्या 3:00 बजे सभी गृह रक्षकों ने अपनी गिरफ्तारी दे दी. इसके बाद गृहरक्षकों के लिए संजय गांधी स्टेडियम में ही अस्थाई जेल बनाकर उन्हें रखा गया. इस दौरान न तो उन्हें ठीक ढंग से खाने का इंतजाम और ना ही पानी और अन्य सुविधाएं दी गई.

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29 मार्च को शाम 5 बजे सभी गृह रक्षकों को सरकार ने रिहा कर दिया. इसके बाद गृह रक्षकों ने राजभवन न्याय मार्च का आयोजन 5 अप्रैल को किया था. जिसके बाद राज्यपाल के आश्वासन पर गृह रक्षकों का हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी. आगे कन्हैया रॉय ने बताया कि 6 अप्रैल को सभी गृह रक्षक अपने ड्यूटी ज्वाइन करने अपने जिला पहुंचे तो अधिकारियों ने कहा कि DG (गृह) PN राय मोबाइल पर मैसेज कर सभी जिला समादेष्टाओं को गृह रक्षकों को ज्वाइन कराने से मना कर दिया था. जिसके बाद सरकार के इन फैसलों से आहत होकर सभी गृह रक्षक 15 मई को फिर से संजय गांधी स्टेडियम में इकट्ठा होकर प्रदर्शन करते हुए गर्दनीबाग धरना स्थल पहुंच अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगाने के लिए धरना प्रदर्शन किया.

इसी दौरान गृहरक्षकों के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी खुद धरनास्थल पहुंचकर गृह रक्षकों के समर्थन की बात कहीं. जिसके बाद प्रधान सचिव गृह आमिर सुबहानी से हुई सौहार्दपूर्ण वार्ता के बाद आश्वस्त गृहरक्षकों के प्रतिनिधियों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी. गृह रक्षक प्रदेश संघ के संरक्षक सोमप्रकाश, अध्यक्ष अरुण कुमार ठाकुर, वरीय उपाध्यक्ष कन्हैया राय, महासचिव सुदेश्वर प्रसाद तथा सदस्य राकेश कुमार उपाध्याय के अलावा कोई अन्य सदस्य भी उपस्थित थे.

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