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बिहार सरकार के खुले में शौचमुक्त अभियान पर लग रहा है ग्रहण,खुले में शौच जाने को विवश हैं विधालय के बच्चे…

विद्यालय फोटो

<P<डीबीएन न्यूज/छपरा(आयूब रजा)- जिला के नगरा प्रखण्ड में खुले में शौच जाने को विवश हैं विधालय के बच्चे.स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ा रहे है क्षेत्र के स्कूल.एक तरफ सरकार खुले में शौच से मुक्त करने की कवायद चला रही है,वहीँ दूसरी ओर देखा जाए तो शौचालय जैसी जरूरी सुविधा भी स्कूली बच्चों को नहीं मिल पा रहा है. शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते बिना शौचालय के स्कूलों में बच्चे पढ़ने को बाध्य हैं.

स्कूलों में शौचालयों को गंदा कर छोड़ दिया गया है,जिसका उपयोग बच्चे नहीं कर पा रहे हैं.उन्हें इसके लिए खुले में जाना पड़ रहा है.कुल मिलाकर स्कूल स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते प्रतीत हो रहे हैं. सरकार के लाख प्रयास के बावजूद भी प्रखंड क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय जैसे संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें सुविधा से दूर रखा जाए तो यह सिर्फ शिक्षकों व अफसरों की लापरवाही ही कही जा सकती है.

शौचालय उपलब्ध न हों तो कारण समझ में आता है,लेकिन शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा सिर्फ खुद के प्रयोग तक स्कूलों के शौचालयों को सीमित रखना उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है.यह मामला उत्क्रमित मध्य विधालय कादीपुर का है.स्कूलों में हजारों बच्चे आज भी शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं.

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जानकारी के अनुसार, स्कूलो में बच्चों की संख्या कुल मिलाकर करीब 800 सौ से अधिक है.सरकार स्कूलों में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय बनाने के नाम पर करोड़ों की राशि पानी के तरह बहाया.बावजूद इसके अब तक विद्यालय में शौचालय की व्यवस्था भी जर्जर हालत में है .विद्यालय में शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त नहीं रहने से विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र खासकर छात्राओं एवं शिक्षिका को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.

नाम नही छापने के शर्त पर कई छात्राओं का कहना है कि स्कूल में शौचालय के गन्दा रहने से छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. कभी सफाई नहीं करवाई जाती है.इसका असर स्कूल में छात्राओं की उपस्थिति पर भी दिख रहा है.ग्रामीणों में फैजान अख्तर अंसारी,अरमान आलम,आदम अली,रब्बानी,नूरानी सहित दर्जनों का कहना है कि एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत,स्वस्थ भारत के नारे लगाकर स्वस्थ भारत के सपने दिखा रही है,वहीं दूसरी तरफ शौचालय तक की भी व्यवस्था नहीं कर पा रही है. जहां शौचालय बना है वो देखरेख के अभाव में बेकार साबित हो रहा है.इस विधालय में सभी तरह की समस्या है लेकिन इसका विभाग नजर अंदाज कर रहा है.अभिभावको का कहना है कि अगर कही छोटे-छोटे बच्चे शौचालय संचालित न होने के कारण स्कूल से बाहर निकल जाते हैं.यदि कोई हादसा हो तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा.

वहीं प्रधानाध्यापक नुरुल होदा अंसारी ने कहा कि विधालय की सभी समस्याओ से और शौचालय की साफ़ सफाई न होने से बच्चों को अच्छी खासी परेशानी होती है.इसके लिए कई बार विभाग को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई हैं.शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है.


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