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नित्यानंद पर जदयू हुआ हमलावर, बीजेपी से पूछे पांच सवाल…

nityanand rai

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जदयू ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री नित्यानन्द राय पर झुठ व फरेब के सहारे अतिपिछड़ा वर्ग को बरगलाने का आरोप लगाया है. अतिपिछड़ा वर्ग समूह को नौकरियों में आरक्षण जननायक कर्पूरी ठाकुर ने दिया और वैद्यानिक अधिकार के साथ मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पंचायत चुनाव में 20 प्रतिशत आरक्षण देकर हाशिये पर के समाज को मुख्यधारा में जोेड़ा.

नेताओं ने कहा कि पैक्सों के चुनाव में अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों के सदस्यता शुल्क नहीं लेने का नीतिगत निर्णय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के स्तर पर लिया गया. साथ ही अतिपिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को मैट्रीक प्रथम श्रेणी से उत्तिर्ण करने पर 10,000/- (दस हजार) रूपये का वजिफा देने का अभियान श्री नीतीश कुमार ने चलाया और अतिपिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के उच्चतर शिक्षा के लिए राज्य सरकार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास राज्य के विभिन्न जिलों में निर्माण करने का निर्णय लिया। आज कई जिला में बनकर भवन तैयार है.

अतिपिछड़े वर्ग के अधिकारों की रक्षा हेतू मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने राज्य अतिपिछड़ा वर्ग आयोग का पहली बार गठन किया.

जद (यू0) ने भाजपा से सवाल किया है कि:-

1) विगत लोकसभा चुनाव में बिहार में नरेन्द्र मोदी जी को अतिपिछड़ा समाज का बताया गया था। भाजपा के झांसे में आकर अतिपिछड़े वर्ग के लोगों ने वोट किया किन्तु प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका प्रमाण-पत्र सार्वजनिक नहीं किया?

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2) तत्कालिन भाजपा अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह कर्पूरी ठाकुर जयंति समारोह में केन्द्र सरकार बनने के बाद कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करने का आश्वासन दिया था। किन्तु कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया गया?

3) राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ा वर्ग में विभाजन कर तीन भागों में विभक्त करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा, लेकिन तथाकथित अतिपिछड़ा वर्ग के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकार प्रस्ताव को दबाकर बैठी हुई है?

4) केन्द्रीय मंत्रिमंडल में बिहार से अतिपिछड़ा वर्ग से एक भी मंत्री नहीं बनाया गया है। यह अतिपिछड़ा वर्ग के साथ छल व प्रपंच है?

5) मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अतिपिछड़ा वर्ग को लोकसभा व विधानसभा में आरक्षण देने हेतू सर्वसम्मति से विधानमंडल का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा। मोदी सरकार उस पर कुण्डली मार कर बैठी है?

केन्द्र सरकार के तीन साल पूरा होने के बाद भी अब तक सरकार द्वारा अतिपिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए किसी भी तरह की कोई भी योजना की घोषणा नहीं की गई, जबकि प्रधानमंत्री जी को अतिपिछड़ा समुदाय से जोड़ा गया. भाजपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा आम चुनाव व वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा आम चुनाव में अनेक लोक-लुभावने वायदे किये, पर एक भी कार्य अतिपिछड़ों के हित में कार्य किये गये.

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