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JEE में हुआ बड़ा बदलाव, बिहारी छात्रों को होगा इसका अधिक फायदा

STUDENT-EXAM
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फोटो:biharboard


पटना.न्यूज़डेस्क. मनाव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाले ज्वाइंट एंट्रेस एग्जाम (जेईई) में अगले साल से बदलाव करने का फैसला लिया है. 2017 से जेईई मेन की ​रैंकिंग में बोर्ड परीक्षा के अंकों को दी जाने वाली 40 फीसदी वेटेज खत्म कर दी जाएगी. हालाँकि 12वीं की परीक्षा में मिलने वाले अंकों को जेईई में शामिल होने का प्रमुख आधार बनाया गया है.

मंत्रालय ने कहा कि इस संबंध में अशोक मिश्रा समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया गया है. अगले साल से जेईई परीक्षा में बैठने के लिए छात्र-छात्राओं को 12वीं परीक्षा में कम से कम 75 फीसदी अंक लाले होंगे या फिर अपने बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में स्थान पाना होगा. एससी एवं एसटी उम्मीदवारों के लिए बोर्ड अंकों की सीमा 65 फीसदी रखी गई है.

अभी सिर्फ आईआईटी में एडमिशन के लिए बोर्ड में 75 फीसदी अंक या टॉप 20 पर्सेंन्टाइल में आने की अनिवार्यता थी. अब यह जेईई परीक्षा में बैठने की न्यूनतम आवश्यकता होगी जबकि अभी न्यूनतम अंक सीमा 45 फीसदी होती है जो एआईसीटीई के तय मानकों के अनुरूप है.

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सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड के मुकाबले बिहार के बच्चें का 12वीं के अंकों का प्रतिशत कम रहता है. इससे रैंक लिस्ट में यहां के छात्र पिछड़ जाते थे. अब जबकि 12वीं बोर्ड के अंकों का वेटेज नहीं मिलेगा तो सभी को एक समान अंकों के आधार पर देश भी की एनआईटी में दाखिला मिल सकेगा.

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