Input your search keywords and press Enter.

पत्रकारों पर हो रहे हमले पर अयूब रजा की यह रिपोर्ट नीतीश सरकार को हिला कर रख देगी..

nitish kumar4

nitish kumar4


अयूब रजा स्पेशल रिपोर्ट. कलम की ताकत के सामने किसी की एक नहीं चलती है और जब कलम सच लिखने का साहस करती है तो उससे प्रभावित लोग निडर कलमकारों को दबाने की तमाम असफल कोशिश करते है. जब कलम के माध्यम से व्यवस्था में व्याप्त बुराइयों पर कुठाराघात करने का प्रयास कोई ‘पत्रकार’ करता है तब कई बार उसे समाज के उन ठेकेदारों जिन्हें हम ‘दलाल’ के नाम से जानते है उनमे बेचैनी बढ़ने लगती है और फिर वही दलाल अपने स्वार्थसिद्धि के राह में रोड़ा बन रहे पत्रकारों को अपना निशाना बनाते हैं. उन्हें धमकियाँ दी जाती है तथा जान से मारने की कोशिश भी की जाती है. सरकार सुरक्षा दे या न दे हम पत्रकार निडर हों कर राज्य और समाज के लिए लिखते रहेंगे.

इन सब के बीच दलालों को शायद इस बात का भान नहीं होता कि अगर कलम का सच्चा सिपाही दृढ़निश्चय कर ले तो दलालों की आड़ में भ्रष्टाचार का गोरखधंधा चला रहे आकाओं को चंद मिनटों में उनकी औकात दिखा सकता है.

Loading...

छपरा के एक समर्पित पत्रकार अमन कुमार ने भी जब जिला परिवहन विभाग में दलालों के बढ़ते वर्चस्व पर अपनी साहसिक रिपोर्टिंग के माध्यम से प्रहार करना शुरू किया तो अमन एवं उनके एक साथी को दलालों ने फोन पर जान से मारने की धमकी दे डाली. दलालों को लगा की एक धमकी से नौजवान पत्रकार डर जाएगा पर अमन कुमार ने इस घटना के बाद बताया कि ‘मैं किसी के धमकी से डरने वाला नहीं, मेरी लेखनी आगे भी व्यवस्था में व्याप्त बुराइयों पर प्रहार करती रहेगी और जब तक मैं इसे समाप्त कराने में सफल नहीं हो जाता तबतक ऐसे ही लिखता रहूँगा’.

अमन कुमार के इस बेबाक टिप्पणी ने साहसिक और निःस्वार्थ पत्रकारिता करने वालों का हौसला बढ़ाया है वहीं सरकारी विभाग के आकाओं के साथ मिलकर दलाली करने वाले लोगों को भी क़रारा जवाब मिल गया है. जिले के तमाम पत्रकारों ने भी अमन कुमार को अपना समर्थन देते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके इस मुहीम में जमकर साथ देने की बात कही है.

हालांकि इस घटना से उन अधिकारियों की भी आँख खुलेगी जो एयरकंडीशन दफ्तरों में बैठकर ये सोंचा करते है कि पत्रकार की क्या औकात, सौ-पचास देकर सलटा लेंगे. कुछ स्वार्थी और तथाकथित पत्रकारों ने आज अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एक ऐसी छवि बना रखी है जिससे सशक्त पत्रकार भी भीड़ का हिस्सा ही नजर आते है. लेकिन अमन कुमार जैसे साहसिक लेखन करने वाले सैकड़ों पत्रकार आज भी मौजूद है जो एक साथ संगठित होकर कलम को तलवार बनाने के लिए तैयार हैं.

इस न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.
[addtoany]