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मिथिला के ऐतिहासिक सौराठ सभा में लोटी पुरानी रौनक, इस वर्ष होने जा रहा 365 शादियां

फ़ाइल फ़ोटो

रौशन झा: मिथिला संस्कृति की पहचान ‘सौराठ सभा’ में इस साल तीन दशक के बाद पुरानी रौनक देखने को मिली. 700 साल के इतिहास और यहां की संस्कृति को समेटे इस सभा में इस वर्ष न केवल देश के बल्कि प्रवासी मिथिलावासी भी पहुंचे. इस वर्ष नौ दिनों तक चलने वाली इस सभा में 365 शादियां तय हुईं इसके अलावा दो विवाह सभागाछी स्थल में ही संपन्न हुए. परंपरा के मुताबिक, यहां पहले गुरुकुल से सीधे योग्य युवकों को सौराठ सभागाछी में लाया जाता था. इन योग्य शिक्षित युवकों की प्रतिभा को देखकर लड़कियों को परिजन उनके लिए उचित वर चुनकर गुरुओं से पूछकर विवाह तय करते थे.

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इस तरह रिश्ते तय करने दौरान यह भी देखा जाता था कि लड़कों के पैतृक परिवार के सात पुश्तों में और मातृक परिवार के पांच पुश्तों में पहले कभी सीधे कोई रिश्ता न रहा हो. इसके बाद गुरुजन ‘अधिकार निर्णय’ करवाते थे. ऐसे अधिकार निर्णय को एक ताड़ के पत्ते पर लाल स्याही से लिखवाया जाता था, जिसे ‘सिद्धांत’ कहते था. इसके बाद शादी तय होती थी.कालांतर में इस सभागाछी का महत्व समाप्त होता चला गया। इस वर्ष मिथिलालजक फाउंडेशन समेत कई संगठनों ने इस सभा को पुनर्जीवित करने की कोशिश की. उनकी यह कोशिश सफल नजर आई क्योंकि इस सभा में प्रतिदिन हजारों की भीड़ जुटी. दरभंगा के कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति सर्वनारायण झा ने इस वर्ष सौराठ सभा की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा, ‘इस वर्ष प्रबुद्धजनों की मेहनत रंग लाई और उसका परिणाम है कि मिथिला की सभ्यता और संस्कृति पुनर्जीवित होती दिखी.


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