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गरीब सवर्णों को भी जल्द मिल सकता है आरक्षण का लाभ

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फोटो:TheHindu

नेशनल डेस्क.
आरक्षण को लेकर गरीब सवर्णों की मांगें भी मानी जा सकती है. राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग के चेयरमैन ने इस सिलसिले में संकेत दिए हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, आयोग ने यह माना है कि किसी व्यक्ति की जाति की तरह उसके व्यवसाय को भी पिछड़ेपन के मानक के रूप में स्वीकार किया जा सकता है. मंडल कमिशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में भी यह कहा गया था कि पिछड़ापन का आधार बनाने के लिए सरकार को जाति के अलावे किसी अन्य मानक को अपनाना चाहिए.

गौरतलब है कि कई राजनीतिक दल और सामाजिक संस्थाएं भी गरीब सवर्णों को आरक्षण का लाभ देने के लिए लगातार आवाज उठाती रही हैं. बीएसपी प्रमुख मायावती ने भी संविधान दिवस पर राज्यसभा में इसकी वकालत की थी. उधर राजस्थान की बीजेपी सरकार पहले ही इस सिलसिले में कानून बना चुकी है.

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पिछड़ा आयोग के चेयरमैन जस्टिस वी. ईश्वरैय्या ने इस संबंध में सरकार को एक ‘आर्थिक पिछड़ा वर्ग'(EBC) बनाने का सुझाव देने की बात कही है. इसके लिए उन्होंने 2011 में हुई सामाजिक-आर्थिक और जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट का सहारा लेने की बात कही. उन्होंने ओबीसी लिस्ट को ‘पिछड़ा वर्ग’, ‘अति पिछड़ा वर्ग’ और ‘अत्यधिक पिछड़ा वर्ग’ में बांटने की भी सलाह दी है.

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने अभी तक जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है. इसके लिए राजद प्रमुख लालू यादव केंद्र सरकार पर हमेशा से हमले करते रहे हैं. बिहार चुनावों से ठीक पहले केंद्र ने सिर्फ सामाजिक-आर्थिक आधार पर जनगणना रिपोर्ट का प्रकाशन किया था.

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