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तेजस्वी मांझी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बाहुबली की उपस्थिति को लेकर शुरू हुआ बवाल, नीरज कुमार ने किया बड़ा खुलासा….


न्यूज़ डेस्क: कल सुबह तक तक एनडीए में शामिल हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपना पाला बदलते हुए महागठबंधन में शामिल हो गए हैं. कल इसकी विधिवत रूप से उन्होंने पूर्व डिप्टी सीएम व वर्त्तमान में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ कल शाम में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा कर दी.

हालांकि इस कॉन्फ्रेंस को लेकर एक बड़ा विवाद हो गया है. जनता दल यूनाईटेड के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसको लेकर मांझी तेजस्वी पर हमला बोला है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाहुबली राजन तिवारी की उपस्थिति को लेकर दोनों पर निशाना साधा है. नीरज कुमार ने कहा है कि एक ओर जहां राजद की दुर्दिन की कहानी यह है कि पूरी पार्टी रांची के होटवार जेल से नियंत्रित हो रही है, वहीं राजद के नए साथी जीतन राम मांझी भी अपने नए ‘सिपहसलार’ बिहार और उत्तर प्रदेश के चेहरे राजन तिवारी के भी साथ लाए हैं. ऐसे में तेजस्वी जी को न केवल ‘पिता तुल्य’ मांझी जी का साथ मिला बल्कि राजन तिवारी जैसे ‘रत्न’ की प्राप्ति हुई है.

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tejaswi yadav neeraj kumar

file photo


वैसे, इसमें न गलती मांझी जी की है और नाही गलती तेजस्वी जी की है. जानकारी मिली है कि होटवार जेल में सजा काट रहे राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद जी का यही निर्देश अपने पुत्र ‘दागी’ तेजस्वी जी को है कि जितने भी बिहार, यूपी और झारखंड के अपराधी हों, उन्हें राजद के साथ लाया जाए. अब इसका पुख्ता प्रमाण भी मिल गया कि संवाददाता सम्मेलन में हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल जी, जो होटवार जेल और अदालत जाकर लालू से निर्देश और आदेश प्राप्त कर वापस आए थे, उनके ठीक पीछे राजद और हम के नए कर्णधार राजन तिवारी को कुर्सी दी गई.


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नीरज कुमार ने कहा है कि आखिर किसी पार्टी के लिए इससे बड़ा दुर्दिन क्या होगा कि उसका नेतृत्वकर्ता पड़ोसी राज्य की राजधानी रांची के जेल में सजा काट रहा हो और उस पार्टी का मुख्य सलाहकार देश की राजधानी दिल्ली के तिहाड़ जेल में सजा काट रहा हो. ‘दागी’ तेजस्वी जी को सलाह है कि वह अब पटना की बजाए अपनी पार्टी का कार्यालय रांची के होटवार जेल के समीप या रांची अदालत के आसपास खोल लें. आखिर पार्टी के विधायक और सांसद तक को भी इन दोनों जगहों पर अपने अध्यक्ष से मुलाकात करने के लिए परिक्रमा करना पड़ता है और ऐसे भी वहीं से पार्टी के लिए सबकुछ तय होना है. आखिर राज्यसभा और विधान परिषद का टिकट जब भ्रष्टाचार में सजा काट रहे जेल में बंद अध्यक्ष तय करेंगे तो टिकटार्थी भी तो अदालत और जेल का ही चक्कर काटेगा.



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