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नीरज कुमार ने बोला तेजस्वी यादव के यात्रा पर हमला, कहा दलितों का….

tejaswi yadav neeraj kumar
tejaswi yadav neeraj kumar

file photo

हितेश कुमार : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के द्वारा चलाया जा रहा संविधान बचाओं न्याय यात्रा के दरभंगा पहुँचने पर जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि राजद के ’दागी’ युवराज तेजस्वी प्रसाद यादव जी आज दरभंगा में ’मुसहर सम्मेलन’ में भाग ले रहे हैं. उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि उनके पिता लालू प्रसाद जी तथा माता राबड़ी जी के शासनकाल में नरसंहार के दौरान जिन 378 दलित समुदाय से आने वाले लोगों की हत्या की गई थी, उनके परिजनों को आज भी वह स्याह दिन-रात याद है.

उन्होंने बताया कि’दागी‘ तेजस्वी जी, राजद के उस शासनकाल का दर्द आप क्या जानें? आप तो ’सोने का चम्मच’ लेकर इस दुनिया में आए और उसमें भी जो कमी रही, उसे आपके पिताजी ने अन्य लोगों को नौकरी और पद देने के नाम पर बेनामी सपंत्ति के रूप में आपको दे दी. “तुम ने वो वक्त कहां देखा जो गुजरता ही नहीं दर्द की रात किसे कहते हैं तुम क्या जानो?’’ आज आप ’मुसहर सम्मेलन’ में लोगों को अपनी बात कहने गए हैं. राजद के शासनकाल में 46 नरसंहार मामले में 378 बेकूसरों की हत्या कर दी गई थी.

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आपके पिता और मां ने अब तक उन परिवारों से माफी नहीं मांगी, परंतु आप उन्हीं की तो विरासत संभाल रहे हैं. आप भी उनकी तरह ही बेनामी संपत्ति के मालिक बन रहे हैं, तो आज इस सम्मेलन में उन परिवारों से माफी मांग लीजिए. इससे न केवल उन मृतात्माओं को शांति मिलेगी बल्कि आपका सम्मान भी इस समाज में बढ़ेगा. तेजस्वी जी, राजद के शासनकाल में भोजपुर में 12, अरवल में 7, पटना और जहानाबाद में 6-6, नालंदा व गया में 3-3, रोहतास व सीवान में 2-2 तथा लखीसराय, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर तथा पूर्णिया में एक-एक नरसंहार की घटनाएं हुई थी, जिसमें 378 दलित समुदाय के लोगों को समय से पहले अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ‘दागी’ तेजस्वी जी, जो आप कर्म कर रहे है, उसका फल इसी पृथ्वी पर ही भोगना है. आपके पिता को चारा घोटाले के एक मामले में उच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली है. आज आपके बुजुर्ग पिता को परिवारों के बीच रहने की जरूरत थी परंतु उनके किए कर्म का फल भगवान ऐसे दे रहे हैं. इसलिए, आप से गुजारिश है कि अपने लिए न सही अपने पिता के द्वारा किए गए कर्मों का पश्चाताप करते हुए इस सम्मेलन में उन नरसंहारों के लिए उन पीड़ित परिवारों से क्षमायाचना करें, शायद इन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की दुआएं आपके पिता को मिल जाए. आपके पिता भी रांची की अदालत परिसर में मात्र 100 रुपये एक बच्ची को दानकर दुआ करने की भीख मांग रहे थे, परंतु यह दुआ ये लोग तभी देंगे जब उनसे छीन चुके परिवारों के लिए आप क्षमा मांगे.


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