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नियोजित शिक्षकों के लिए बुरी खबर, नीतीश सरकार ने दिया तगड़ा झटका, गुस्से में शिक्षक संघ ने दी धमकी….

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न्यूज़ डेस्क: पटना हाईकोर्ट में सरकारी स्कूलों के नियोजित शिक्षक के समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग पर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए नियोजित शिक्षक के हक़ में फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट के आए इस फैसले के बाद बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा था कि कोर्ट के इस फैसले को अध्ययन करने के बाद ही बिहार सरकार किसी भी तरह का निर्णय लेगी. इस फैसले के बाद बिहार सरकार इसके अपील में जा सकती है.

बता दें कि हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षक कि मांग समान काम-समान वेतन को सही ठहराया है. इसके साथ ही कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन नहीं देने को भी असंवैधानिक बताया है. जिस बात का डर था वहीँ हुआ नियोजित शिक्षकों को लेकर पटना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के उक्त आदेश की प्रति उन्हें प्राप्त हो गयी है. हम उसका अध्ययन कर रहे हैं. कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद नियमानुसार सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जायेगी.

नीतीश सरकार के इस फैसले से शिक्षक संघ में रोष व्याप्त हो गया है. परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ की फ्रेजर रोड में बैठक हुई जहां राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील में जाने की तैयारी पर आक्रोश जताया गया. साथ ही राज्य सरकार की याचिका पर वरीय अधिवक्ताओं का सहयोग लेने की बात कही गयी. अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने संघ की एक शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना होगी. यदि राज्य सरकार ने तीन महीने के अंदर हाईकोर्ट के फैसले पर अमल नहीं किया, तो राज्यभर के शिक्षक सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे. बिहार प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की ओर से हाईकोर्ट के फैसले का हू-ब-हू लागू करने की मांग किया. प्रदेश अध्यक्ष राकेश कुमार भारती ने कहा कि उच्च न्यायालय ने नियोजित शिक्षकों के समान काम के लिए समान वेतन की मांग को सही ठहराया है.

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दुसरी तरफ भाजपा के प्रवक्ता व विधान पार्षद प्रो नवल किशोर यादव ने कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ही समान काम के लिए समान वेतन का आदेश दे चुका है, तो हाईकोर्ट के फैसले पर फिर वहीं अपील करने पर उसका खारिज होना तय है. यादव ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से सुप्रीम कोर्ट में अपील में ले जाने संबंधी निर्णय पर पुन: विचार करने का अनुरोध किया है. उन्होंने ही शिक्षा मंत्री क्रिष्णनंदन वर्मा से इस बात की समीक्षा करने को कहा है कि 42 अंगीभूत व अन्य नव अंगीभूत कॉलेजों से संबंधित कितने मामले अब तक हाईकोर्ट में दायर किये गये. उनमें से कितने मामले राज्य सरकार जीत सकी है. उन्होंने कहा है कि 99 प्रतिशत मामलों में सरकार की हार हुई है.

गौरतलब है कि वरीय अधिवक्ता पीके शाही, राजेंद्र प्रसाद सिंह, विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा ने शिक्षकों को मिल रहे वेतन में भेदभाव का आरोप लगाया था. जिसके बाद महाधिवक्ता ललित किशोर ने सरकार के तरफ से पक्ष लेते हुए कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति सरकार नहीं करती है. इसलिए समान काम के समान वेतन का सिद्धांत नियोजित शिक्षकों पर लागू नहीं होता है. जिसके बाद हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षक की मांग को सही ठहराया है.

शिक्षक के तरफ से याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत नियोजित शिक्षकों से कार्य तो एक समान ही लिया जा रहा है लेकिन उसक बदले सामान वेतन नहीं दिया जा रहा है. स्कूल में काम कर रहे नियोजित शिक्षकों का वेतन विद्यालय में कार्यरत चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों से भी कम है.

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