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बाढ़ पर हाय रे सरकार की दलील, शराब पीने के बाद अब चूहों ने कराई बिहार की किरकिरी…

हितेश कुमार,पटना: उतरी बिहार के अधिकांश हिस्से में आई प्रलयंकारी बाढ़ के कारण लोगों के जनजीवन अस्त व्यस्त हो गए है. बाढ़ से अब तक कुल दो करोड़ से ज्यादा की आबादी प्रभावित हो चुकी है, और करीब 500 लोगों को भी बाढ़ ने अपने साथ बहा ले गई. इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल के विधायक और प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने राज्य सरकार की विफलताओं को बाढ़ का कारण बताया और कहा कि बिहार में आए भीषण बाढ़ राज्य सरकार के नाकामी का नतीजा है.

बाढ़ के तैयारियों की समीक्षा के बाद सदन के अंदर बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री ने कहा था कि तटबंधों को पुख्ता कर दिया गया है. किसी प्रकार की कोई त्रासदी नहीं होगी. जबकी लापरवाही का प्रतिफल सामने भयावह त्रासदी के रूप में आया. 70 साल के आजादी के इतिहास में इस तरह की त्रासदी कभी नहीं आई थी. फ्लड फाइटिंग के नाम पर अरबों रुपए अभियंता और संवेदक की मिलीभगत से रसूखदार लोग घटक गए और जनता मातम झेल रही है. यह त्रासदी की मौत नहीं लापरवाही की मौत है और अपराधिक लापरवाही भी है. डीएम गोपालगंज, डीएम दरभंगा सहित अन्य जिला के पदाधिकारी के पत्राचार के माध्यम से आगाह के बावजूद भी सरकार चुपचाप बैठे रह गई. और इनके कुप्रबंधन ने त्रासदी को आने का निमंत्रण दिया.

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shakti-yadav

file photo

यह बाढ़ आयी नहीं बल्कि यह बाढ़ राज्य सरकार के द्वारा लाई गई है. बेशर्मी का आलम यह है कि बांधों के कटाव के लिए चूहों को दोषी ठहराया जा रहा है. राज्य सरकार की इस दलील ने बिहार को शर्मसार किया है. उपहास का कारण फिर एक बार बिहार बना है. सच यह है कि चूहे नहीं राज्य के खजाने पर बैठे हुए जो चूहे हैं उनके कुकृत का प्रतिफल बिहार की त्रासदी है पर नैतिकता यहां पर सो जाती है. काश अगर इस पद पर बैठा कोई दूसरा होता तो नैतिकता को जागने में एक पल भी नही लगता.

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