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दिल्ली पुलिस की सतर्कता बचा सकती थी आदित्य की जान, पढें कैसे…

aditya dead body

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-सुधाकर सिंह
गया के आदित्य सचदेवा की रोड रेज में हत्या ने जहां एक तरफ बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किये है वहीं दूसरी तरफ विपक्ष को नीतीश सरकार को घेरने को मौक मिला गया है. राज्य में घटित होने वाले अन्य आपराधिक घटनाओं की तरह ही इस हत्या को भी जंगलराज से जोड़ा जा रहा है.

क्या इस रोड रेज के मामले को जंगलराज से जोड़ ठीक होगा? क्या बिहार की पुलिस इस हत्या को रोक सकती थी? इसका सीधा सा जवाब है नही. किसी भी राज्य की पुलिस रोड रेज को नही रोक सकती. किसी भी राज्य कि पुलिस यह अनुमान नही लगा सकती कि इस जगह पर रोड रेज की घटना होने वाली है, इसलिए इस घटना को बिहार में जंगलराज से जोड़ना ठीक नही होगा.

रोड रेज में हुई यह हत्या दुखद है. ऐसे मामले पूरे देश में देखने को मिलते है. उप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा कि रोड रेज के मामले दिल्ली में सबसे ज्यादा होते है. मगर कोई वहां जंगलराज की बात नही करता है.

जब भी कोई हत्या होती है उसे राजनीति मोड़ दे दिया जाता है. कोई उस समस्या को सुलझाने की ओर नही सोचता है. गया के रोड रेज का मामला भी इसी ओर जा रहा है. अगर हत्या करने वाला एक साधारण व्यक्ति होता तो यह मामला पुलिस के किसी फाइल में धूल चाट रही होती.

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खैर इस घटना के बाद सबसे जरूरी बात दोषी को सजा दिलाना है. ताकि मृतक के परिजनों का सरकार पर भरोषा बना रहे. कुछ लोग इस मामले की जांच सीबीआई से करवाना चाहते है. पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने आदित्य हत्या कांड की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है. जांच चाहे जो भी ऐजेंसी करें ख्याल इस बात का रखना जरूरी है इस पर राजनीति ना की जाए.

गया के इस हत्या कांड ने हमें सोचने पे मजबूर कर दिया है कि ऐसी क्या वजह है कि कोई व्यक्ति चलती राह में मरने मारने को उतारू हो जाता है. राज्य की पुलिस और प्रशासन के दोष देने से पहले इस मु्द्दे पर सोचना जरूरी है.

इस हत्याकांड का दूसरा पहलू भी है. अगर रॉकी के पास पिस्टल ना होती तो इस हत्या को रोकी जा सकती है. पिस्टल का लाइसेंस दिल्ली से मिला है और वह भी बिना किसी जांच के. किसी राज्य कि पुलिस बिना जांच के लाइसेंसे कैसे दे सकती है?

उप मुख्या मंत्री तेजस्वी यादव ने भी इस पर आपत्ति जाहिर की है. उन्होने कहा कि दिल्ली की अखबारों में छपा है कि बिना जांच के दिल्ली पुलिस ने किसी व्यक्ति को हथियार रखने का लाइसेंस कैसे दे दिया? उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि केंद्र की ऐसी कौन सी ताकत है जिसके बल पर रॉकी का लाइसेंस मिला.
(यह लेखक के अपने विचार है)

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