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हाय रे नीतीश का सुशासन! बहाली के एक साल बाद भी नहीं मिला चयन पत्र

house women

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मोतिहारी.मधुरेश. सुशासन बाबू की सरकार के अंदाज निराले हैं. यहां नियम कानून से कोई लेना देना नहीं है. अधिकारी हो या कर्मचारी सभी के अपने अलग-अलग कानून हैं. तभी तो पूर्वी चम्पारण जिले के पहाड़पुर प्रखंड अंतर्गत पूर्वी सिसवा पंचायत के आंगनबाड़ी केन्द्र संख्या 156 स्थित मिनी आंगनबाड़ी केंद्र पर बहाली प्रक्रिया पूरी होने के एक साल बाद भी सेविका को चयन पत्र नहीं मिल सका है.

बहाली की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले पर भी अब तक कोई कार्रवाई भी नहीं हो सकी है।सेविका के चयन का यह लंबित मामला पूर्वी चम्पारण जिला प्रशासन एवं बिहार सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है. दबंगई और पैसे के बल पर एक गरीब अभ्यर्थी को चयनपत्र से वंचित कर दिया गया है. हद तो तब हो गई जब वंचित अभ्यर्थी द्वारा बार-बार न्याय की गुहार लगाने के बावजूद कोई अधिकारी बात सुनने को तैयार नहीं होता है. यह इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचारियों के आगे सरकारी मुलाजिम भी लाचार हो गये हैं.

क्या है पूरा मामला- समेकित बाल विकास परियोजना पहाड़पुर के पूर्वी सिसवा पंचायत में केन्द्र संख्या 156 पर मिनी आंगनबाड़ी सेविका पद के लिये कुल तीन आवेदिकाओ ने आवेदन किया.

(01) किरण देवी
(02) सबनम आरा
(03) सीमा कुमारी

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किरण कुमारी के परिजन जनप्रतिनिधि तथा भैसुर-देवर बिहार सरकार के वेतनभोगी कर्मचारी हैं जो अरेराज अनुमंडल क्षेत्र में कार्यरत हैं. इस कारण से किरण कुमारी सेविका पद के लिये आयोग्य ठहरायी गयी. वहीं दूसरी आवेदिक सबनम आरा उक्त आंगनबाड़ी के पोषक क्षेत्र से बाहर यानि दूसरे वार्ड की है. इस प्रकार से एकमात्र आवेदिका सीमा कुमारी हीं इस पद की योग्य उम्मीदवार हैं.

जिनका चयन आमसभा मे किया गया था,लेकिन चयन पत्र से ही वंचित कर दिया गया. चयनपत्र से वंचित अभ्यर्थी सीमा कुमारी ने बताया कि चयन के समय किरण देवी के ससुर के भाई पंचायत के मुखिया थे, तथा वे पहाड़पुर के उपप्रमुख रह चुके है, और उन्हीं के प्रभाव के कारण मुझे चयनपत्र नहीं मिला।किरण देवी पूर्वी सिसवां के नामी जमींदार परिवार से आती हैं.

सीमा कुमारी ने बीडीओ पहाड़पुर के अलावें डीएम के जनता दरबार में भी पहुंच कर न्याय की अर्जी लगायी, लेकिन अफसोस कि एक दबंग परिवार की महिला को सेविका पद पर नियम विरुद्ध बहाल करने के लिए सरकारी मुलाजिमों ने कसम खा लिया है और सेविका बहाली की सभी अहर्ताओं को पूरा करने वाली सीमा कुमारी विगत एक साल से अपने वाजिब हक के लिए दर-दर भटक रही है. अगर यही स्थिति बनी रही तो बिहार सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर से आम जनता खासकर गरीबों का विश्वास उठ जाएगा.




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