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संजय यादव ने किया खुलासा, बीजेपी को कैसे नचाया उँगलियों पर

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पटना.न्यूज़ डेस्क: बिहार में आरजेडी की जबरदस्त जीत के पीछे वैसे तो पार्टी के काफी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मेहनत शामिल है, मगर कुछ ऐसे चेहरे भी है जिन्होंने परदे के पीछे से अपना योगदान दिया है. राजद के रणनीतिकार संजय यादव ने बीजेपी के हार का खुलाश करते हुए कहा, ‘उनके (बीजेपी) नेता गलत बयान देते रहे. इसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा. बिहार विधानसभा चुनाव में बैटिंग और फील्डिंग हमने सेट की, यहां तक कि बीजेपी की ओर से बोलर कौन होगा, यह भी हम ही सेट कर रहे थे और उससे फुलटॉस बोलिंग करवा रहे थ. उनको खेल का पता ही नहीं था.

हरियाणा के 32 साल के एक युवक संजय यादव को पूरा भरोसा था कि इस बार राजद बहुमत के साथ बिहार में जीत हासिल करेगी. उन्हें इतना भरोसा इस लिए था क्यूंकि वह बीते तीन साल से इस पर काम कर रहे थे.


संजय यादव ने दिल्ली से एमएससी और एमबीए की है. वह लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव के दोस्त हैं. उन्होंने जब आरजेडी के ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रचार की कमान संभाली तब वह एक आईटी कंपनी में काम करते थे और तेजस्वी आईपीएल में अपना करियर बनाने की कोशिश कर रहे थे. जब भी यह दोस्त मिलते थे तो राजनीति की बाते खुद-बा-खुद निकल आती थी.

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जब 2010 के बिहार विधानसभा चुनावों के बाद आरजेडी की हालत ठीक नहीं थी तब इन दोस्तों ने अपनी आईपीएल और आईटी को छोड़ पार्टी को बिहार में मजूबत करने को लेकर काम करना शुरू कर दिया. जब संजय ने बिहार में राजद को ले कर अध्यन किया तो पाया कि पार्टी की हार महज कुछ वोटों से हो रही है. इसका मतलब था लोगों का भरोसा जीत कर पार्टी का प्रदर्शन ठीक किया जा सकता है. इन्होंने छह-छह महीने के छोटे टागरेट तय किए और युवाओं को फोकस कर सेमिनार किए.

संजय ने बताया कि आरजेडी के पास संसाधनों की कमी थी. सोशल मीडिया, वॉट्सऐप आदि के इस्तेमाल से मोदी सरकार के 17 महीने के काम को निशाना बनाना शुरू किया. जिन मुद्दों को ले कर मोदी ने चुनाव जीता था उन मुद्दों को उठाना शुरू किया. लोगों को आज की और पहले की तस्वीर दिखानी शुरू की. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में वह भ्रम में रह गए थे. उन्हें लगा कि बीजेपी का प्रचार लोगों पर असर नहीं करेगा मगर या इस बार वह तैयार थे.

संजय ने बताया कि उनके पांच लोगों की एक टीम थी. जिसमें अनैलिसिस, ट्रैकिंग करने वाला, डिजाइनर और कार्टूनिस्ट शामिल थे. वह लालू के सभी विरोधियों, विपक्षी नेताओं सुशील मोदी आदि पर नजर रखते थे.

उन्होंने आगे कहा कि वह पर्दे के पीछे से काम कर रहे थे. आगे लालू जो कहेंगे वह उस भूमिका को निभाने को तैयार है. उन्होंने लालू को उनकी विचार की वजह से जॉइन किया है. वह उन्हें अपने अभिभावक की तरह मानते है.
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