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लखीसराय के शिक्षा विभाग के डीपीओ कटघरे में, एसडीओ ने डीपीओ की भूमिका को बताया …..

लखीसराय ( एस0के0गांधी)-शिक्षा विभाग के डीपीओ माध्यमिक रमेश पासवान द्वारा बगैर सत्यता की जांच किए ही शिक्षकों पर लगे झूठे आरोप पर कार्रवाई करने की मिली शिकायत पर श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा के आदेश पर बीते बुधवार को एसडीओ मुरली प्रसाद सिंह ने डीईओ सुनयना कुमारी के साथ उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिसमा पहुंचकर जांच की.

प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार गुप्ता के विरुद्ध डीपीओ द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने एवं डीपीओ द्वारा उच्च विद्यालय महिसोना के प्रधानाध्यापक डॉ अवधेश कुमार के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता का लगाए गए आरोप की जांच की.

दोनों विद्यालयों से जुड़े मामले की जांच के बाद एसडीओ ने बताया कि डीपीओ माध्यमिक द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह गलत है. शिक्षकों पर डीपीओ द्वारा जो भी आरोप लगाए गए हैं वह पूरी तरह से फर्जी है. इस मामले में डीपीओ से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा.

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एसडीओ ने बताया कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिसमा के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार गुप्ता के विरुद्ध दर्ज कराई गई प्राथमिकी पूरी तरह गलत है.एसडीओ ने कहा कि डीपीओ ने प्रधानाध्यापक श्री गुप्ता पर सोनी कुमारी से मोटी राशि लेकर टोला सेवक दिनेश मांझी को हटाकर गलत तरीके से बहाली करने का आरोप लगाया था. इसकी जब जांच की गई तो पाया गया कि दिनेश मांझी वर्ष 2011 में स्वेच्छा से त्याग पत्र दिया था. उस समय विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद पर कृष्णा कुमारी थी.जिस समय सोनी कुमारी की बहाली टोला सेवक पद पर की गई थी उस समय प्रधानाध्यापक ब्रजकिशोर प्रसाद थे.

एसडीओ ने कहा कि वर्तमान प्रधानाध्यापक संजय कुमार गुप्ता का पूरे मामले से कोई लेना देना नहीं है.
इस मामले में डीपीओ द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह जांच में गलत है. एसडीओ ने उच्च विद्यालय महिसोरा के प्रधानाध्यापक डॉ. अवधेश कुमार के विरुद्ध डीपीओ माध्यमिक रमेश पासवान द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोप को पूरी तरह से फर्जी बताया है.

उस विद्यालय के रामप्रवेश कुमार नाम के एक शिक्षक ने डीपीओ को प्रधानाध्यापक के विरुद्ध शिकायत की थी.जिसकी सत्यता की जांच किए बगैर डीपीओ माध्यमिक ने गलत आरोप लगाकर प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की है. सभी अभिलेखों की जांच की गई तो पाया गया कि विद्यालय में गुटबाजी के कारण यह विवाद बढ़ा है. जिसमें डीपीओ की भूमिका पूरे मामले में संदिग्ध है.


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