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शराबबंदी पर सर्वोच्च न्यायालय ने लिया अहम फैसला

फाइल फोटो


सौरभ कुणाल. बिहार में महागठबंधन की सरकार ने पिछले साल बिहार में शराबबंदी लागु कर दी थी जिसमें शराब का निर्माण, व्यापार, बिक्री और सेवन प्रतिबंधित किया गया था हालाकि गत वर्ष सितंबर में पटना उच्च न्यायालय अपने एक आदेश में बिहार में शराब बंदी कानून को रद्द कर दिया था जिस पर बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.
बिहार सरकार का मानना है शराबबंदी कानून को रद्द करने से बिहार में शराबबंदी की मुहिम को झटका लगा और इसलिए सर्वोच्च न्यायालय में इसके विरूद्ध याचिका दायर किया गया जिसमें संविधान के अनुछेद 47 का हवाला देते हुये यह कहा गया है कि संविधान का भाग चार राज्य के नीति निर्देशक तत्व राज्य सरकार को ऐसी नीतियाँ बनाने का अधिकार देता है.

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बिहार सरकार का कहना है कि उच्च न्यायालय ने शराबबंदी को रद्द करते हुए यह नहीं देखा कि खुद सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने कई आदेशों में कहा है कि राज्य सरकार शराबबंदी को लेकर आदेश जारी कर सकती है.

इसी सिलसिले में बिहार सरकार ने शराबबंदी के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने शराबबंदी मामले में बिहार सरकार को राहत देते हुए हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी थी जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शराबबंदी कानून को गैरकानूनी करार दिया था.

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में शराब का कारोबार करने वाली चार कंपनियों के लाइसेंस को दुबारा चालु करने से इंकार कर दिया है और पटना उच्च न्यायालय को आदेश दिया है कि इस मामले में बेंच गठित कर दस मई के भीतर सुनवाई कर फैसला करें.

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