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सुशील मोदी भी कम नहीं है, दिल्ली जाने से पहले लालू को कह गये हिम्मत है तो…जाते-जाते लड़ाई..


सुशील मोदी ने एक बार फिर लालू यादव और कांग्रेस को चुनौती दिया है. जीएसटी का विरोध करने वाले राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद जिनके विधायकों की संख्या 80 और कांग्रेस की 27 हैं को यह ऐलान करने की हिम्मत है कि बिहार में जीएसटी लागू नहीं होने देंगे. जब जीएसटी बिल संसद और विधानमंडल में सर्वसम्मति से पारित किया जा रहा था तब इन दोनों ने समर्थन क्यों किया था?

2015-16 की तुलना में 2016-17 में बिहार में वाणिज्य कर की वृद्धि दर मात्र 9 प्रतिशत रही. जीएसटी लागू होने के बाद केन्द्र सरकार ने राज्यों को वाणिज्य कर में सलाना 14 फीसदी वृद्धि की गारंटी दी है. 14 फीसदी से कम कर संग्रह होने पर मुआवजा मिलेगा। उपभोक्ता राज्य होने के कारण बिहार में 25 फीसदी तक वृद्धि संभावित है. 

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जीएसटी लागू होने पर माल की ढुलाई में चेक पोस्ट के कारण लगने वाले समय में 16 प्रतिशत की कमी आएगी. छोटे कारोबारियों की परेशानी के मद्देनजर 20 लाख तक के टर्नओवर वालों को कर से मुक्त रखा गया है वहीं 75 लाख तक वालों को मात्र 1 फीसदी कर देना होगा. 

लालू प्रसाद को कर संग्रह और वृद्धि से कोई मतलब नहीं हैं, उन्हें तो अपने परिवार की एक हजार करोड़ की बेनामी सम्पति बचाने की चिन्ता है. कांग्रेस के जिन दो वित मंत्रियों प्रणव मुख्यर्जी और पी चिदम्बरम ने जीएसटी की मूल अवधारणा को आगे बढ़ाया, जिस जीएसटी बिल को देश  के 29 राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों  ने सर्वसम्मति से पारित किया उस का विरोध कर कांग्रेस अपनी ओछी राजनीति का परिचय दे रही है.

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