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शराबबंदी के बीच तेजस्वी ने उठाया है बड़ा सवाल, तो क्या सिर्फ शराबबंदी राजनीतिक स्टंट है?

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file photo


न्यूज़ डेस्क: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कल प्रेस कॉन्फ्रेंस कल सूबे की मुखिया के शराबबंदी पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि ज़हरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी को नीतीश जी ने मुख्यमंत्री ने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया. आरोपी जदयू का प्रखंड अध्यक्ष भी है. ठोंको ताली शराबबंदी के नाम पर.

उन्होंने आगे कहा है कि महागठबंधन से हटने के बाद नीतीश जी का शराबबंदी काग़ज़ों पर रह गया है. जदयू के पदाधिकारी ही ज़हरीली शराब का धंधा कर पार्टी फ़ंडिंग करते है. शराब का सबसे ज़्यादा अवैध धंधा जेडीयू के लोग करते है क्योंकि उन्हें पता है उनकी गिरफ़्तारी नहीं होगी. उन्हें सीएम का सीधा संरक्षण प्राप्त है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री बतायें अबतक जेडीयू के कितने कार्यकर्ता और पदाधिकारी शराबबंदी क़ानून में गिरफ़्तार हुए है? तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश जी, आरा ज़हरीली शराबकांड के मुख्य आरोपी राकेश सिंह को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर सम्मानित करते है. क्यों? CM आवास में प्रवेश पाने के लिए जदयू के विधायक, सांसद तक को भारी मशक्कत करनी पडती है, ऐसी स्थिति में शराब कांड के आरोपी को वहाँ इतनी आसानी से प्रवेश कैसे मिल गया ? किसके जरिए वे आए थे?

जेल जाने के बाद भी आरा ज़हरीली शराबकांड का मुख्य आरोपी जेडीयू का प्रखंड अध्यक्ष कैसे बना हुआ था? क्या यही है आपका सुशासन और शराब बंद करने का फ़ॉर्म्युला? शराबबंदी के नाम पर अबतक कितने हज़ारों ग़रीब लोगों को जेल में डाला है और अवैध धंधा करने वाले कितने अमीरों को बचाया है? अपनी छवि बनाने के लिए एक क़ानून बनाकर उसे भूल जाना और फिर दूसरा नया क़ानून बनाना ही इनका मुख्य उद्देश्य होता है. मुख्यमंत्री की ज़हरीली शराबकांड के आरोपी के साथ सेल्फ़ी पुष्टि करती है कि दूसरे क़ानून के नाम पर अपनी छवि चमकाने के लिए अवैध शराब का कारोबार करने वाले को ये घर बुलाकर सम्मानित और प्रोत्साहित करते है.

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ज़हरीली शराब के कारोबार से नादान इंसानों की हत्या करने वाले को CM “छवि कुमार” सेल्फ़ी से नवाजते है. नीतीश जी बतायें, शराबबंदी के दौरान शराब के अवैध कारोबार से उनकी पार्टी को कितनी फ़ंडिंग हुई? अब जनता के बीच यह सुगबुगाहट भी तेज़ हो गई है कि सम्भवतः नालंदा के जदयू पदाधिकारी के घर अवैध शराब पकड़ने पर ही मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव के के पाठक का ट्रान्स्फ़र किया गया था? सवाल तो खड़े होगें ही क्यूंकि अपने हर विरोधी की खबर रखने वाली जदयू और सीएम नीतीश जहरीली शराब काण्ड का मुख्य आरोपी पार्टी में प्रखंड अध्यक्ष पद पर बैठा था और किसी को पता नहीं यह बात कुछ जंच नहीं रही है भले ही मौके पर विवाद से पल्ला झाड़ने के लिए कहा जा सकता है. जब सीएम खुद कह रहे हैं पार्टी की सदस्यता ग्रहण किया जाता है तो रशीद पर सबकुछ इगित होता है तो फिर जिला अध्यक्ष को पता नहीं था कि जहरीली शराब काण्ड का आरोपी है खैर गलती किसी का हो, गलती तो फिर जदयू नेताओं की ही मानी जायेगी जो शराब माफिया को शराबबंदी लागू होने के वाबजूद उसके रसूख के कारण अध्यक्ष बनाए हुए था. अगर ये पहला मामला है तो और पार्टी में कितने ऐसे लोग हैं उसका भी पता करे नहीं तो लोगों के जेहन में एक ही बात आएगी की पार्टी के मुखिया शराबबंदी की बात करते हैं नेता शराब माफिया और खुलेआम शराब के नशे में पकड़े जाते हैं तो बंदी किसके लिए है कहीं ये सिर्फ वोट के लिए राजनितिक स्टंट तो नहीं?


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