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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर लंच पर पहुंचे सीएम योगी,बेटे और बहू को दिया आशीर्वाद

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेेने के बाद अपने करीब साढ़े वर्ष के कार्यकाल में सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पहली बार उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के घर का रुख किया.सीएम योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों तथा आरएसएस के बड़े पदाधिकारी के साथ केशव प्रसाद मौर्य के घर पर दोपहर का भोजन भी किया.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सीएम योगी आदित्यनाथ का मंगलवार दोपहर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास पर जाना काफी चर्चा का विषय बना है.मुख्यमंत्री बनने के बाद मंगलवार को पहली बार योगी आदित्यनाथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सरकारी आवास पर पहुंचे.उनके साथ डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वंत्रत देव सिंह, भाजपा उत्तर प्रदेश के महामंत्री संगठन सुनील बंसल, आरएसएस के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल तथा क्षेत्र प्रचारक अनिल कौशल भी लंच में थे.

इसी दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने केशव प्रसाद मौर्य के बेटे की शादी की बधाई वाली औपचारिकता भी पूरी की। माना जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ का केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास पर जाना उत्तर प्रदेश भाजपा तथा प्रदेश में एक जुटता का संदेश देने की कोशिश है. वहां पर सीएम योगी आदित्यनाथ करीब डेढ़ घंटा तक रहे.बताया जाता है कि लंबे समय से दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था.डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच आपसी मनमुटाव भी काफी चर्चा में है.

इससे पहले सोमवार की रात ही भाजपा की कोर कमेटी की बैठक सीएम के सरकारी आवास में हुई थी. इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह भी शामिल हुए थे.

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में 2017 से भाजपा की सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच सब कुछ ठीक नहीं रहा है. केशव प्रसाद मौर्य 2017 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे और भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज कर 2017 में उत्तर प्रदेश में सरकार बना ली थी. तब यह माना जा रहा था कि केशव प्रसाद मौर्य ही अगले मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को कुर्सी सौंप दी। तब केशव को डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा था.