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दलित वोट न बंटे इसके लिए यह उपाय करेंगी मायावती

चुनाव के समय सभी जातीय समीकरण बनाने में व्यस्त हो जाते है और इसका एक सबसे बड़ा कारन है कि लोग जाट-पात उलझन में आज भी बंटे है. बीजेपी के एससी-एसटी कार्ड और वोटों के ध्रुवीकरण की चिंता अब मायावती को सताने लगी है. मायावती चाहती है कि उनके तथाकथित वोट बैंक में कोई सेंध न लग सके. इसके लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने तैयारी शुरू कर दी है.

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मायावती ने बसपा कार्यकर्ता की एक फ़ौज बनाई है जो घर-घर जाकर बीजेपी सरकारों में दलित उत्पीड़न की कहानी तथ्यों के साथ बताएंगे. मायावती के निर्देश पर टीमों का गठन भी हो गया है. भीमा कोरेगांव, रोहित वेमुला से लेकर यूपी में हुए तमाम घटनाओं के लेकर पर्चे और किताब भी छपवाए जा रहे हैं.

दरअसल, बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे को देखते हुए बसपा ने दलितों के उत्पीड़न के मुद्दे को लोकसभा चुनाव में व्यापक तौर पर उठाने की योजना तैयार की है. बसपा नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव आते-आते बीजेपी सभी हिंदुओं को अपने साथ लाने के लिए दलितों को किसी भी तरह अपने साथ लाने की कोशिश करेगी. इसकी शुरुआत केंद्र की मोदी सरकार ने संसद के जरिए एससी/एसटी का नया कानून बनाकर कर भी दी है. बीएसपी नेताओं को यह भी आशंका है कि बीजेपी दलितों को अपने साथ लाने के लिए कई और तरीके भी अपना सकती है.

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