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प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस को लेकर योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला


न्यूज़ डेस्क :प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस को लेकर योगी कैबिनेट ने कड़ा रुख इख़्तियार करते हुए बड़ा फैसला लिया है. अब कोई भी प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकता है. सरकार ने निजी स्कूलों की सालाना फीस वृद्धि का फॉर्मूला तय कर दिया है, अब स्कूल इस नियम के तहत ही नवीनतम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में पिछले सत्र के शुल्क का पांच प्रतिशत जोड़ते हुए हर साल इतनी ही फीस बढ़ा सकेंगे.

शर्त यह होगी कि इस तरह से निर्धारित किया गया शुल्क स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों की मासिक प्रति व्यक्ति आय में हुई वृद्धि के औसत से अधिक नहीं होगा. यदि कोई भी स्कूल सरकार के द्वारा तय मानक से अधिक की फीस बढ़ोतरी करता है तो पहली बार स्कूल प्रबंधन पर एक लाख रुपये और दूसरी बार पांच लाख रूपये आर्थिक दंड लगाया जाएगा. तीसरी बार भी स्कूल प्रबंधक ऐसा करता है तो स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी. कल योगी कैबिनेट की बैठक में उप्र स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश, 2018 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है. जल्द ही यह लागू भी किया जाएगा. यह अध्यादेश उन सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा जिनका वार्षिक शुल्क 20 हजार रुपये से अधिक है, यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आइसीएसई व अन्य बोर्ड से मान्यताप्राप्त/संबद्ध स्कूल सहित वे सभी विद्यालय इस दायरे में आएंगे जिन्हें ‘अल्पसंख्यक दर्जा हासिल है. वहीं प्री-प्राइमरी स्कूलों को इस से अलग रखा गया है.

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प्रस्तावित अध्यादेश में जरुरी नियम:-

1. किताबें, जूते-मोजे खरीदने के लिए अभिभावक को बाध्य नहीं किया जा सकता है.

2. पांच साल से पहले यूनीफॉर्म को स्कूल नहीं बदल सकता है.

3. स्कूल को अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत से 60 दिन पहले आगामी सत्र में प्रस्तावित फीस को अपनी वेबसाइट या नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित कर उसे सार्वजनिक करना होगा.

4. प्रवेश शुल्क स्कूल में दाखिले के समय सिर्फ एक बार लिया जाएगा इसके आलावा कोई भी कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा. यदि छात्र स्कूल छोड़ जा रहा है तो उन्हें प्रतिभूति शुल्क सभी देयों को समायोजित करते हुए वापस करना होगा.

5. नई व्यवस्था के तहत निजी स्कूल साल भर की फीस एक साथ नहीं ले सकेंगे. वे मासिक, त्रैमासिक या अर्धवार्षिक आधार पर ही फीस ले सकता है.

6. छात्रों को दी गईं सुविधाओं के लिए उनसे प्राप्त धनराशि और स्कूल परिसर में आयोजित व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय शामिल होगी.

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