विंडोज 11 को लेकर माइक्रोसॉफ्ट की नई रणनीति: ‘विंडोज K2’ प्रोजेक्ट से सिस्टम होगा और भी फ़ास्ट
विंडोज 11 को अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया था, लेकिन तब से लेकर अब तक यह यूजर्स के दिलों में वह जगह नहीं बना पाया है जिसकी माइक्रोसॉफ्ट को उम्मीद थी। कड़े हार्डवेयर नियमों और कुछ अटपटे डिज़ाइन बदलावों के कारण लोगों ने इसे अपनाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। दरअसल, 14 अक्टूबर 2025 को विंडोज 10 का सपोर्ट खत्म हो रहा है, ऐसे में विंडोज 11 का मार्केट शेयर तो तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके यूजर एक्सपीरियंस को लेकर शिकायतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऑफिस और विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम ही माइक्रोसॉफ्ट की असली पहचान हैं। जब विंडोज ब्रांड पर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर पूरे माइक्रोसॉफ्ट की साख पर पड़ता है। इसी गिरती साख को बचाने और सिस्टम की कमियों को दूर करने के लिए कंपनी 2026 में एक नया इंटरनल प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है, जिसे ‘विंडोज K2’ नाम दिया गया है। विंडोज लेटेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का पूरा फोकस विंडोज 11 की परफॉरमेंस और स्टेबिलिटी को बेहतर बनाने पर होगा।
तकनीकी मोर्चे पर बड़े बदलावों की तैयारी अब माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम डेवलपमेंट, अपडेट और टेस्टिंग के तरीके को पूरी तरह से बदलने जा रहा है। विंडोज इनसाइडर चैनल के जरिए अपडेट जारी करने से पहले क्वालिटी चेक को और भी सख्त किया जाएगा, ताकि बग्स को कम किया जा सके। नए फीचर्स अब एक साथ थोपने के बजाय धीरे-धीरे रोलआउट होंगे। अगर तकनीकी बदलावों की बात करें, तो WinUI 3 की मदद से स्टार्ट मेनू की स्पीड में 60% तक का भारी इज़ाफ़ा देखने को मिलेगा। इसके अलावा, विंडोज एक्सप्लोरर में अब फाइलें तुरंत सर्च की जा सकेंगी। सिस्टम को और स्थिर बनाने के लिए डिस्प्ले ड्राइवर्स अब सिर्फ सिस्टम रिबूट के दौरान ही अपडेट होंगे। साथ ही, 8 जीबी रैम वाले डिवाइस पर सिस्टम की परफॉरमेंस को खास तौर पर ऑप्टिमाइज़ किया जाएगा।
गेमिंग और कड़े मुकाबले की चुनौती गेमिंग के मामले में भी काफी कुछ नया होने वाला है। लिनक्स और स्टीम ओएस (SteamOS) जैसे विकल्पों से मिल रही कड़ी टक्कर ने माइक्रोसॉफ्ट की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कई गेम्स तो अब स्टीम ओएस सिस्टम पर विंडोज के मुकाबले ज्यादा बेहतर और तेज़ चल रहे हैं। इसके साथ ही, एप्पल के नए और किफायती लैपटॉप्स भी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी बैकग्राउंड प्रोसेस का लोड कम करने और कंसोल जैसा इंटरफेस टेस्ट करने पर काम कर रही है। माइक्रोसॉफ्ट का साफ लक्ष्य अगले दो सालों के भीतर गेमिंग परफॉरमेंस को स्टीम ओएस के स्तर तक ले जाना है।
एआई से दूरी और पुरानी गलतियों में सुधार पिछले कुछ सालों में टेक दिग्गज ने कोपायलट (Copilot) जैसे जेनरेटिव एआई टूल्स को विंडोज 11 और माइक्रोसॉफ्ट 365 में जमकर इंटीग्रेट किया। पर सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा देखकर लगता है कि यह दांव कुछ खास काम नहीं आया। एआई फीचर्स और अनस्टेबल अपडेट्स को लेकर हुई तीखी आलोचना के बाद कंपनी कुछ कदम पीछे खींच रही है। सूत्रों की मानें तो माइक्रोसॉफ्ट ने अब विंडोज को एक “एजेंट ओएस” बनाने का अपना पुराना प्लान ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसके बजाय, अब यूजर्स को अपडेट्स को अनिश्चित काल के लिए टालने का विकल्प दिया जा रहा है। साल की शुरुआत में ही कंपनी ने विंडोज 11 की कुछ बड़ी कमियों को दूर करने का प्लान साझा किया था। इसके तहत यूजर्स का पसंदीदा मूवेबल और रिसाइजेबल टास्कबार वापस लाया जा रहा है और स्टार्ट मेनू को री-डिज़ाइन किया जा रहा है, हालांकि इस नए इंटरफेस को लेकर लोगों की राय अभी भी काफी बंटी हुई है।
क्या लौट पाएगा पुराना भरोसा? माहौल कुछ वैसा ही लग रहा है जैसा कभी विंडोज विस्टा के दौर में था। उस समय भी विस्टा लेट था, लोगों को वह नहीं मिला जो वे चाहते थे। एग्जीक्यूटिव शॉ ने इस बात का जिक्र किया था कि कैसे आलोचकों ने तब कंपनी की काबिलियत पर सवाल खड़े किए थे और मान लिया था कि यह ऑपरेटिंग सिस्टम अब खत्म हो चुका है। आज विंडोज 11 के साथ भी माइक्रोसॉफ्ट कमोबेश इसी तरह की मुश्किल में फंसा है। लेकिन इस बार कंपनी ने अपनी गलतियों से सीखते हुए कई ठोस कदम उठाए हैं। ‘विंडोज K2’ प्रोजेक्ट के तहत डेवलपमेंट टीमों के काम करने के तरीके में बदलाव किया जा रहा है। डेवलपर्स और टेस्टिंग प्रोग्राम के प्रतिभागियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए ऑफलाइन विंडोज इनसाइडर मीटिंग्स भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। यह नया प्रोजेक्ट विंडोज 11 के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, जो शायद आखिरकार यूजर्स को वह एक्सपीरियंस दे सके जिसका उन्हें सालों से इंतज़ार था।