दलाल स्ट्रीट पर सुस्ती, जबकि ग्लोबल मार्केट में AI का जादू: क्या है बाजार का मौजूदा मूड?
27 मई का दिन शेयर बाजार के लिए दो अलग-अलग दुनिया की तस्वीर लेकर आया। एक तरफ जहां वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आंधी से जबरदस्त हरियाली है, वहीं अपने घरेलू बाजार यानी दलाल स्ट्रीट पर एक अजीब सी सुस्ती और ठहराव देखने को मिला। बुधवार सुबह निफ्टी और सेंसेक्स ने काफी ठंडी शुरुआत की। सुबह 9:15 बजे निफ्टी 50 करीब 33 अंक गिरकर 23,880.35 पर खुला, तो सेंसेक्स भी 69 पॉइंट फिसलकर 75,939 के स्तर पर नजर आया। हालांकि, शुरुआती झटके के बाद बाजार ने खुद को थोड़ा संभाला और सुबह 9:21 तक निफ्टी 0.07% की मामूली बढ़त के साथ 23,929.80 और सेंसेक्स 0.16% चढ़कर 76,090 पर आ गया।
साफ दिख रहा था कि निवेशकों का मूड थोड़ा उखड़ा हुआ है। प्री-मार्केट सेशन में अहमदाबाद में गिफ्ट निफ्टी के फ्यूचर्स भी 0.08% नीचे ही ट्रेड कर रहे थे। वित्तीय वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही के नतीजों के इस आखिरी दौर में अब ज्यादातर निवेशक ब्रॉड मार्केट की बजाय सिर्फ चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगा रहे हैं।
जियोपॉलिटिकल टेंशन और क्रूड ऑयल का साया
घरेलू बाजार में इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का अस्थिर होना है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा, जब उन्होंने एक ही दिन में 2,407.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। हालांकि, घरेलू निवेशकों (DIIs) ने 1,361 करोड़ रुपये की खरीदारी करके बाजार को थामने की कोशिश जरूर की, लेकिन सोमवार की तेजी के बाद जो प्रॉफिट बुकिंग का दौर चला, उसमें यह सपोर्ट बाजार को हरे निशान में मजबूती से टिकाए रखने के लिए नाकाफी था।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब अपने 13वें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव और एक बेहद नाजुक सीजफायर के बीच आई इस खबर ने भी बाजार की धड़कनें बढ़ा दीं कि इजरायल द्वारा लेबनान में की गई एक एयरस्ट्राइक में 31 लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हुए हैं। इन सबके बीच निवेशकों की नजरें अब सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कैबिनेट मीटिंग के नतीजों पर टिकी हैं, जहां से शायद इस विवाद के जल्द सुलझने का कोई सुराग मिल सके।
क्रूड ऑयल हमेशा से हमारे बाजार का सेंटीमेंट तय करता है। पिछले पांच ट्रेडिंग सेशंस में वैश्विक स्तर पर हल्की राहत के चलते तेल की कीमतों में 5% की गिरावट जरूर आई, लेकिन बुधवार को भारतीय समयानुसार ब्रेंट क्रूड फिर से 95 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा था। बाजार को इस बात का डर सता रहा है कि अगर शांति वार्ता का तीसरा दौर भी विफल होता है, तो ऊर्जा की कीमतों में अचानक एक बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
बाजार के टॉप गेनर्स और लूजर्स
इस सुस्त और अनिश्चित माहौल में भी कुछ शेयरों ने गजब का दम दिखाया। शुरुआती कारोबार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर हिंडाल्को ने सबसे तगड़ी 3.6% की छलांग लगाई। इसके अलावा NTPC, पावर ग्रिड कॉर्प और इटरनल के शेयरों में 1.9% की तेजी दिखी, जबकि टेक महिंद्रा (0.91%) और टाटा स्टील (0.7%) भी बढ़त बनाने में कामयाब रहे।
वहीं दूसरी ओर, सरकारी कंपनियों और बैंकिंग स्टॉक्स में बिकवाली का भारी दबाव रहा। कोल इंडिया के शेयर करीब 4% लुढ़क गए, जबकि ONGC में 3% की गिरावट दर्ज की गई। HDFC बैंक, HDFC लाइफ इंश्योरेंस, आयशर मोटर्स और BEL जैसे दिग्गज शेयर भी लाल निशान में ही गोते लगाते नजर आए।
सात समंदर पार AI का अलग ही जश्न
जहां भारतीय बाजार तेल और युद्ध की चिंताओं में उलझे हैं, वहीं अमेरिका और बाकी ग्लोबल मार्केट्स का रुख बिल्कुल अलग है। वॉल स्ट्रीट में AI के बूम ने कंप्यूटर चिपमेकर्स और टेक कंपनियों के शेयरों में भारी खरीदारी ला दी है, जिसके चलते अमेरिकी बाजार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। एसएंडपी 500 (S&P 500) फ्यूचर्स और डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज दोनों ही बढ़त के साथ ट्रेड करते दिखे।
इस ग्लोबल टेक रैली का सबसे बड़ा सितारा माइक्रोन टेक्नोलॉजी रहा, जिसके शेयरों में 19.3% का जबर्दस्त उछाल आया। यह तेजी तब आई जब यूबीएस (UBS) के एनालिस्ट्स ने इसके 12 महीने के टारगेट प्राइस को 535 डॉलर से बढ़ाकर सीधे 1,625 डॉलर कर दिया, जिसके बाद माइक्रोन का शेयर 895.88 डॉलर पर बंद हुआ।
वॉल स्ट्रीट की इसी तेजी की लहर यूरोप और एशिया तक महसूस की गई। शुरुआती कारोबार में जर्मनी का DAX 0.7% उछलकर 25,359.59 पर और पेरिस का CAC 40 0.5% की बढ़त के साथ 8,215.74 पर पहुंच गया, हालांकि ब्रिटेन के FTSE 100 में हल्की गिरावट रही।
एशियाई बाजारों की बात करें तो ताइवान और दक्षिण कोरिया में कंप्यूटर मेमोरी की बेतहाशा डिमांड ने शेयर बाजारों को इस साल ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। सियोल का कोस्पी (Kospi) 2.3% की शानदार छलांग के साथ 8,228.70 पर बंद हुआ, जिसका बड़ा श्रेय सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में आई 2.3% की तेजी को जाता है। उधर टोक्यो में, निक्केई 225 (Nikkei 225) ने भी दिन के कारोबार में टेक शेयरों (जैसे टोक्यो इलेक्ट्रॉन और एडवांस्टेस्ट) की बदौलत 66,000 का जादुई आंकड़ा छुआ, लेकिन दिन के अंत में यह लगभग फ्लैट होकर 64,999.41 पर बंद हुआ।
कुल मिलाकर, फिलहाल दुनिया भर के शेयर बाजार दो बिल्कुल अलग ध्रुवों पर खड़े नजर आ रहे हैं—एक तरफ AI के भविष्य को लेकर भारी उत्साह है, तो दूसरी तरफ जियोपॉलिटिकल हकीकत का खौफ। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में दलाल स्ट्रीट किस सेंटीमेंट को ज्यादा तरजीह देता है।